पंचायत नोटिस से उपजा विवाद, मौरीखुर्द पुल पर हिंसक झड़प

छग

Update: 2026-01-11 12:53 GMT
Dhamtari. धमतरी। धमतरी जिले के ग्राम भैसमुंडी में पंचायत के नोटिस और पोल्ट्री फार्म संचालन को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर आपराधिक झड़प में बदल गया है। 10 जनवरी 2026 को मौरीखुर्द पुल के पास हुई इस घटना में सरपंच पक्ष और पोल्ट्री फार्म संचालक पक्ष—दोनों ने एक-दूसरे पर मारपीट, गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए हैं। मामले में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को अलग-अलग बयान दिए गए हैं और जांच जारी है।

सरपंच पक्ष का आरोप
ग्राम भैसमुंडी के सरपंच ओमप्रकाश यादव का कहना है कि गांव की घास भूमि (शासकीय/सार्वजनिक उपयोग की भूमि) पर भूषण चन्द्राकर द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर पोल्ट्री फार्म का संचालन किया जा रहा है। इस संबंध में ग्राम पंचायत ने 6 जनवरी 2026 को बैठक कर प्रस्ताव पारित किया और संबंधित दस्तावेज पंचायत में प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया। सरपंच के अनुसार 9 जनवरी को 12 बजे पंचायत बैठक निर्धारित थी, जिसका नोटिस पंचायत चपरासी टामिन पटेल के माध्यम से भेजा गया, लेकिन निर्धारित समय पर भूषण चन्द्राकर उपस्थित नहीं हुए।

सरपंच ने आगे आरोप लगाया कि 10 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे जब वे अपने निजी कार्य से बोलेरो वाहन (CG 05 AB 9426) से भैसमुंडी से कुरूद जा रहे थे, तब मौरीखुर्द पुल के पास भूषण चन्द्राकर के पुत्र लक्की चन्द्राकर ने रास्ता रोककर गाली-गलौच की और “पोल्ट्री फार्म बंद करवाने वाले कौन होते हो” कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि इसी दौरान लक्की ने धारदार चाकू से सरपंच की पीठ पर वार कर चोट पहुंचाई। शोर-शराबा सुनकर भूषण चन्द्राकर और उनका परिचित किरण पाल मौके पर पहुंचे और तीनों ने मिलकर हाथ-मुक्कों से मारपीट की। सरपंच पक्ष का दावा है कि बीच-बचाव करने पहुंचे उनके पुत्र तुषार यादव और साथी गोपेश्वर सिन्हा के साथ भी गाली-गलौच और मारपीट की गई।

पोल्ट्री संचालक पक्ष का पक्ष
वहीं, पोल्ट्री फार्म संचालक भूषण चन्द्राकर ने सरपंच के आरोपों को नकारते हुए उल्टा आरोप लगाया है। उनके अनुसार वे पिछले 10 वर्षों से ग्राम भैसमुंडी में पोल्ट्री फार्म का व्यवसाय कर रहे हैं, जिसकी देखरेख उनका पुत्र लक्की चन्द्राकर करता है। 8 जनवरी 2026 को ग्राम पंचायत द्वारा पोल्ट्री फार्म बंद कराने संबंधी प्रस्ताव पारित कर नोटिस जारी किया गया, जो घर में कोई न होने के कारण किसी अन्य ने प्राप्त कर लिया। भूषण चन्द्राकर का कहना है कि 9 जनवरी को पंचायत चपरासी के फोन पर उन्होंने सरपंच को सूचित किया कि वे और उनका पुत्र बाहर हैं, इसलिए बैठक में उपस्थित नहीं हो पाएंगे और पंचायत जो भी निर्णय लेगी, उसे स्वीकार करेंगे।

भूषण चन्द्राकर के मुताबिक, 10 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे उनका पुत्र लक्की सरपंच ओमप्रकाश यादव से बातचीत के लिए मौरीखुर्द पुल के पास मिलने गया, जहां दोनों के बीच इसी मुद्दे पर कहासुनी हुई और झगड़ा बढ़ गया। सूचना मिलने पर वे स्वयं और किरण पाल बीच-बचाव के लिए पहुंचे, लेकिन आरोप है कि सरपंच, उनके पुत्र तुषार यादव और एक अन्य साथी ने गाली-गलौच करते हुए जान से मारने की धमकी दी और लाठी-डंडा व रॉड से मारपीट की। इस हमले में भूषण चन्द्राकर के सिर में चोट आई, लक्की के पूरे शरीर में चोटें आईं, जबकि किरण पाल को धक्का-मुक्की से दर्द की शिकायत हुई। पोल्ट्री संचालक पक्ष का कहना है कि घायलों को पहले सिविल अस्पताल कुरूद ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद लक्की चन्द्राकर को गंभीर चोटों के कारण धमतरी के एकता अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

पुलिस जांच और स्थिति
घटना के बाद दोनों पक्षों ने कुरूद थाने में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों बयानों के आधार पर घटनास्थल, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए जा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज (यदि उपलब्ध) और कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर मामला पंचायत के प्रशासनिक निर्णय से उपजे विवाद का है, जो व्यक्तिगत टकराव में बदल गया।

गांव में तनाव, प्रशासन सतर्क
घटना के बाद ग्राम भैसमुंडी और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। पंचायत स्तर पर भूमि उपयोग और व्यवसाय संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी प्रस्तावित बताई जा रही है, ताकि तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके। फिलहाल, पुलिस की जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह तय होगा कि मारपीट और हथियार के इस्तेमाल के आरोप किस हद तक सही हैं। दोनों पक्षों के चिकित्सकीय प्रमाण और साक्ष्य मामले की दिशा तय करेंगे।
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