Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुणदेव गौतम ने गुरुवार दोपहर राजधानी रायपुर स्थित पुलिस कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया। बिना पूर्व सूचना के पहुंचे डीजीपी ने तुरंत ही रायपुर जिले के सभी सीएसपी (CSP) और एएसपी (ASP) की आपात बैठक बुलाई। बैठक में ऑपरेशन निश्चय को और अधिक प्रभावी और आक्रामक बनाने के लिए नई रणनीति तैयार की गई। इस दौरान रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा, एसएसपी लाल उमेद सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत में
डीजीपी गौतम
ने राजधानी में नशे की रोकथाम, नशा सप्लाई चेन को तोड़ने और नशे की मांग कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऑपरेशन निश्चय को हर स्तर पर प्राथमिकता मिले, और ड्रग नेटवर्क से जुड़े हर छोटे-बड़े मॉड्यूल को जड़ से खत्म किया जाए।

तीन टर्म पर चल रहा है ऑपरेशन निश्चय
रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि ऑपरेशन निश्चय मूल रूप से तीन प्रमुख टर्म पर काम करता है—
ड्रग्स की सप्लाई रोकना
नशे की खपत कम करना
कोर्ट तक मॉनिटरिंग करना
आईजी मिश्रा के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में ड्रग सप्लाई रोकने में बड़ी सफलता मिली है। पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते देश में प्रवेश करने वाले कुल 10 इंटरस्टेट ड्रग मॉड्यूल को ध्वस्त किया गया है। इसके अलावा दिल्ली और मुंबई से आने वाली सिंथेटिक ड्रग्स की बड़ी खेपों पर भी निर्णायक कार्रवाई की गई है। रायपुर पुलिस ने शहर में सक्रिय पेडलर्स और नेटवर्क ऑपरेटर्स पर लगातार दबाव बनाते हुए सप्लाई चेन को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि अब ऑपरेशन का अगला चरण अधिक मानवीय और सामाजिक दृष्टिकोण पर आधारित है—थानों के माध्यम से रिहैब (नशामुक्ति) की प्रक्रिया को तेज करना। पुलिस की योजना है कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों को पहचानकर उन्हें चरणबद्ध तरीके से पुनर्वास केंद्रों से जोड़ा जाए।

2 से 3 लाख लोगों को रिहैब में शामिल करने की तैयारी
आईजी मिश्रा ने नशामुक्ति अभियान की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि पूरे राज्य में 2 से 3 लाख लोगों को रिहैब प्रक्रिया में लाने का लक्ष्य है। हालांकि फिलहाल क्षमता सीमित है, इसलिए प्रथम चरण में उन व्यक्तियों को शामिल किया जा रहा है जिनके परिवार उनका सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “सबसे ज्यादा हिंसक वही लोग हैं जो लंबे समय से नशे की गिरफ्त में हैं। जब मोहल्ले का सबसे बड़ा बदमाश खुद नशा छोड़ने का संदेश देगा, तभी नशामुक्ति अभियान का परिणाम गहराई से दिखेगा।”

ड्रग मॉड्यूल्स पर फाइनेंशियल और फोरेंसिक एनालिसिस
आईजी मिश्रा ने बताया कि ड्रग ट्रेड की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अदृश्य अर्थव्यवस्था है। कई बार मास्टरमाइंड जेल में रहते हुए भी बाहर नेटवर्क चला लेते हैं, क्योंकि पूरा खेल मार्जिन पर आधारित है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब में 800 रुपये में मिलने वाली ड्रग की डिलीवरी रायपुर में 6 हजार रुपये में होती है। इसी मार्जिन के कारण यह कारोबार लगातार फैलता है। सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए पुलिस अब मॉड्यूल्स का फाइनेंशियल एनालिसिस कर रही है ताकि पैसों के प्रवाह और लेनदेन के जरिए मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सके। इसके साथ ही जल्द ही फोरेंसिक एनालिसिस भी किया जाएगा, जिससे सिंथेटिक और केमिकल आधारित ड्रग्स की पहचान, स्रोत और रुट का पता लगाया जा सके।

निश्चय अभियान को और आक्रामक बनाने तैयारी
बैठक में डीजीपी गौतम ने साफ संकेत दिए कि आने वाले दिनों में ऑपरेशन निश्चय और अधिक सख्त और गतिशील रूप से चलाया जाएगा। नशे के कारोबार से जुड़े हर व्यक्ति और नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, कोर्ट मॉनिटरिंग, रिहैब मॉडल और पुलिस-परिवार-समाज की संयुक्त भागीदारी पर गहराई से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर थाने में स्पेशल मॉनिटरिंग सेल बनाई जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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