राष्ट्रीय जंबूरी में भ्रष्टाचार का खुलासा: 400 टॉयलेट्स के नाम पर 88 लाख रुपये की वसूली

छग

Update: 2026-01-10 16:53 GMT

भारत स्काउट एंड गाइड के 75 वें वर्ष की डायमंड जुबली देश की सबसे बड़ी जम्बूरी छत्तीसगढ़ को सौभाग्य प्राप्त हुआ है देश में रेंजर और रोवर वाली पहली जम्बूरी है। दो महीने से बालोद के दुगली में जम्बूरी की तैयारी बड़े जोर शोर से की जा रही थी अच्छा आयोजन करने के उद्देश्य से बहुत ही बड़े पैमाने में तैयारी ज़्यादा से ज़्यादा टेंट बनाना और रहने नहाने और शौचालय का निर्माण करना और VIP ट्रीटमेंट के लिए भी ज़्यादा कार्य था जिसमें मैं ज़्यादा ध्यान दिया गया जबकि जबकि इस आयोजन के लिए टेंडर से पहले ही कार्य शुरू कर दिया गया था टेंडर अनुबंध 5 जनवरी 2026 में हुआ था। जिसका विरोध कंपीटिशन में भाग लेने वाले अन्य टेंट हाउस के संचालकों ने किया और प्रधानमंत्री तक की शिकायत कर दी थी प्रधानमंत्री कार्यालय से लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ को शिकायत की जाँच के लिए पत्र भी आया है जिसके आधार पर ही है छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण सचालनालय 15 दिन के अंदर की जाँच कर रिपोर्ट देने के लिए आदेश संचालक रायपुर संभाग को दिया गया । टेंट हाऊस वालों ने शिकायत में क्या विववरण दिया। १) 400 toilets बनाए गए है 22000/ प्रति टॉयलेट्स के हिसाब से कुल 88 लाख के इतने में तो परमानेंट बन जाते जो ग्रामीणों को लिए और आम जनता के लिए सुलभ उपयोग में आते हैं २) रहने के लिए 16200 स्काऊट्स के लिए टेंट लगाए जिसके लिए 1.43 करोड़ लिए और खाने नास्ते हाई टी की व्यवस्था 11000 स्काऊट्स के लिए की है फिर रुकने पर क्यो अधिक खर्च किया गया पाँच करोड़ अट्ठारह लाख टेंडर में शौचालय , मूत्रालय नहाने की पाँच दिन की टेम्पररी व्यवस्था के लिए।

एक करोड़ बासठ लाख रुपये चार्ज किए गए है यही फ़िज़ूल खर्ची अब बर्बादी के लिए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी आवाज़ उठायी और फिर विवाद का जन्म हो गया सांसद बृजमोहन अग्रवाल की मंशा लापरवाही और विसंगतियों को दूर करने की थी लापरवाही घपले घोटाले की ज़िम्मेदारी भी शिक्षा विभाग पर ना कि बेवजह किसी को कटघरे में खड़ा करना था जो पैसे की बर्बादी और फ़िज़ूल खर्ची बेपरवाह ढंग से हो रही थी उसी के लिए एक शिकायत के आधार पर आवाज़ उठायी गई है बालोद के दुगली मैं आयोजित भव्य जम्बूरी देश में चर्चा का विषय बनी हुई है और दिन प्रतिदिन लोकप्रिय भी हो रही है कार्यक्रम के आयोजन सफलतापूर्वक संचालन किए जा रहे हैं छत्तीसगढ़ का मान सम्मान देश की रेंजर रोवर वाली पहली जम्बूरी से भी हो रहा है रेंजर और रोवर वाली नेशनल जम्बूरी जो 75 वर्ष डायमंड जुबली के आख़िरी जम्बूरी भी है दुनिया में सबसे बड़ी जम्बूरी लखनऊ में आयोजित की गई थी

Balod. बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आयोजित भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय जंबूरी में भ्रष्टाचार और सरकारी नियमों की खुली अवहेलना का मामला सामने आया है। जंबूरी स्थल पर पांच दिन के लिए 400 टॉयलेट, मूत्रालय और नहाने की अस्थायी व्यवस्था के नाम पर भारी धनराशि वसूली गई। सूत्रों के मुताबिक, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 05 जनवरी 2026 को जंबूरी संबंधी कार्यों के लिए आदेश जारी किए थे। हालांकि, इसके लगभग दो माह पहले ही अमर भारत किराया भंडार के संचालक जसपाल ने बिना किसी आधिकारिक आदेश के टेंट, तंबू, लाइट और पानी जैसी व्यवस्थाओं का कार्य शुरू कर दिया था। इससे यह सवाल उठता है कि क्या टेंडर प्रक्रिया वास्तविक थी, और यदि थी तो यह कार्य किस आधार पर अनुमति के बिना प्रारंभ किया गया।




खबर के अनुसार, 400 टॉयलेट की व्यवस्था के लिए 88 लाख रुपये वसूले गए, जबकि एक टॉयलेट के लिए 22,000 रुपये चार्ज किए गए थे, जो बाजार दर से लगभग चार गुना अधिक है। वहीं, करीब 5 करोड़ 19 लाख रुपये के टेंडर में से शौचालय, मूत्रालय और नहाने की अस्थायी व्यवस्था के लिए 1.62 करोड़ रुपये की राशि की वसूली की गई। अधिक चिंताजनक बात यह है कि अमर भारत किराया भंडार को टेंडर मिलने से पहले ही जंबूरी स्थल पर कार्य प्रारंभ करने की अनुमति मिली, जबकि अन्य निविदाकर्ता जैसे एक्सिस कम्युनिकेशन और भारत किराया भंडार को यह पता था कि बिना आदेश कार्य करना सरकारी नियमों का उल्लंघन है। फिर भी, वे कार्य प्रारंभ नहीं कर सके। सूत्रों के मुताबिक, अमर भारत किराया भंडार के संचालक जसपाल को पहले से यह विश्वास था कि मंत्री जी की कृपा से उसे यह टेंडर मिलेगा।
इसके बावजूद उसने दरें बाजार मूल्य से चार गुना अधिक रखी। इस तरह की व्यवस्था ने स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक अनियमितता ही नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश के तहत सरकारी नियमों की अवहेलना की गई और जनता के पैसे की बर्बादी हुई। यह मामला केवल बालोद जिले का नहीं, बल्कि पूरे राज्य प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की जांच की आवश्यकता को उजागर करता है। इसमें मंत्री और उनके करीबी सहयोगियों द्वारा कथित रूप से मिलीभगत की बात सामने आई है। वहीं, जंबूरी स्थल पर कार्यों के प्रारंभ होने से कई अन्य निविदाकर्ताओं के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर खत्म हो गया। यह कदम न केवल वित्तीय अनियमितता का प्रतीक है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास और सरकारी नियमों की अनदेखी का स्पष्ट उदाहरण भी बन गया है।
विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन इस मामले में मांग कर रहे हैं कि इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जाए। दोषियों को सजा देकर भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार और जनता के धन की लूट की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। बालोद राष्ट्रीय जंबूरी में हुए इस खुलासे ने प्रशासनिक निगरानी की कमियों और सरकारी नियमों की अवहेलना के गंभीर पहलुओं को उजागर किया है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करते हैं। इस तरह के मामलों से यह साफ होता है कि बड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता और समय पर निगरानी न होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। जनता और सामाजिक संगठन इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
Tags:    

Similar News

null