Raipur. रायपुर। बूढ़ातालाब का नौका विहार घोटाला 5 साल का सबसे बड़ा घोटाला है। विगत 5 सालों में कांग्रेस की सरकार ने सबसे पहला और बड़ा घोटाला नौका विहार के नाम से शुरू किया था। जिसमें साफ़-साफ़ दिख रहा था कि बूढ़ातालाब की शुरुआत होने के अगले दिन ही सभी नावों से अच्छी कमाई और अच्छी आमदनी थी मगर बताया नाममात्र की जाता था। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल में एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों ने हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, नौका विहार सुविधा, जो वर्षों से आम जनता के लिए आकर्षण और आनंद का माध्यम रही है, अब भ्रष्ट अधिकारियों की काली करतूतों की भेंट चढ़ गई है। इस कथित 'नौका घोटाले' में लाखों रुपये के गबन की बात सामने आ रही है, जिसमें पर्यटन मंडल के कुछ कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि राजभवन में ड्राइवर के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में अपनी राजनीतिक पहुंच और प्रभाव के चलते पर्यटन मंडल में क्लर्क की नौकरी पा ली। इसके बाद उस कर्मचारी ने अपना रसूख इस कदर बढ़ाया कि वह विभागीय गतिविधियों में 'छिपा हुआ बादशाह' बन बैठा। बिना किसी पदाधिकारी जिम्मेदारी के उसने निर्णयों को प्रभावित करना शुरू कर दिया और नौका संचालन जैसी योजनाओं में भी हस्तक्षेप कर भारी वित्तीय लाभ अर्जित किया।
पर्यटन विभाग: संभावनाओं से घाटे की ओर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल पूरे भारत में सबसे अधिक आय देने वाला पर्यटन मंडल बन सकता था। आकर्षण जंगल, रिसोर्ट, और पहाड़-पठार झील-झरनों से भरपूर असीम संपदा का मालिक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल पूरे विश्व के मानपटल पर सबसे ज्यादा पर्यटन आकर्षित करने वाली जगहों में से एक सबसे महत्त्वपूर्ण भ्रष्ट अधिकारियों और नाडा-पैजामाछाप नेताओं के हाथे चढ़ते ही, कांग्रेस सरकार ने कीमती सम्पतियां औने-पौने दामों में बेचीं और अर्थव्यवस्था को घाटे में लाया।
छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग को राज्य की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्तंभ के रूप में विकसित किया जा सकता था। विभिन्न जिलों में पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद, विभाग लगातार घाटे में जा रहा है। इसका मुख्य कारण अधिकारियों की अनियमितताएं और निजी लाभ के लिए की जा रही नीतिगत हेराफेरी मानी जा रही है। राज्य शासन द्वारा संचालित पर्यटन मंडल की होटलों और रिसॉर्ट्स को औने-पौने दामों में कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों, चहेते कलाकारों और राजनीतिक रसूखदारों को लीज़ पर दिया गया। इनमें से कई अलॉटमेंट कथित रूप से बिना पारदर्शी प्रक्रिया के, मनमाने नियम बनाकर किए गए। आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल में इन संपत्तियों का आवंटन कुछ छुटभैये नेताओं को बेनामी रूप से किया गया, जिससे राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
नौका विहार: जनता के मनोरंजन का साधन बना भ्रष्टाचार का जरिया
नौका विहार, जिसे पर्यटन मंडल द्वारा आमजन के लिए स्वच्छंद मनोरंजन और प्राकृतिक अनुभव के रूप में चलाया जाता था, अब कथित तौर पर भ्रष्ट अधिकारियों की निजी आय का स्रोत बन गया। टिकटों की बिक्री, संचालन अनुबंध और रखरखाव में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। राजस्व का बड़ा हिस्सा सीधे अधिकारियों की जेब में गया, जबकि सरकारी खाते में अपेक्षित राशि जमा नहीं की गई। इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। नौका संचालन, होटल लीज़ आवंटन और भूमि हस्तांतरण जैसे तमाम विषयों पर न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी द्वारा गहन जांच करवाई जानी चाहिए। राज्य की कीमती सरकारी संपत्तियों के साथ इस तरह की अनियमितताएं छत्तीसगढ़ की छवि और पर्यटन संभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुँचा रही हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल वित्तीय गबन नहीं, बल्कि जनसेवा की भावना और सरकारी संसाधनों के प्रति विश्वासघात का मामला भी बनता है।
जनता के लूटे गए पर्यटन मंडल द्वारा भ्रष्ट्राचार के पैसों के होते रहेंगें कई बड़े खुलासे देखें रहें jantaserishta.com.