Bilaspur बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पेंशन के पुनर्निर्धारण और बकाया एरियर्स से जुड़े मामले में पूर्व आदेश का समय पर पालन नहीं होने पर सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा को अवमानना नोटिस जारी किया है। मामला दिवंगत नायब तहसीलदार बेनेडिक्ट एक्का की पत्नी बी. एक्का से जुड़ा है। कोर्ट ने कमिश्नर से पूछा है कि आदेश का पालन नहीं होने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद होगी। अवमानना याचिका पर 14 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की अदालत में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा ने पक्ष रखा। बताया गया कि हाईकोर्ट ने इसी मामले में 6 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को 60 दिनों के भीतर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन सात महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी आदेश का पूरा पालन नहीं हुआ।
बी. एक्का ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने दिवंगत पति के सेवाकाल के वेतन निर्धारण, एरियर्स और पेंशन का दोबारा निर्धारण करने की मांग की थी। याचिका पर न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 6 जनवरी 2026 को सुनवाई करते हुए अधिकारियों को सेवा लाभ से जुड़े दावे पर लागू नियमों और नीतियों के अनुसार 60 दिनों के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद बी. एक्का ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर लंबित लाभ देने की मांग की। इसके बाद 11 मई 2026 को सरगुजा संभाग आयुक्त कार्यालय से कलेक्टर को पत्र भेजकर हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। 21 मई को अपर कलेक्टर कार्यालय ने याचिकाकर्ता से पेंशन प्रक्रिया के लिए जरूरी दस्तावेज मांगे।
याचिकाकर्ता ने चार पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और मृत्यु प्रमाणपत्र समेत मांगे गए दस्तावेज जमा कर दिए। इसके बावजूद उनका आरोप है कि पेंशन का पूरा पुनर्निर्धारण नहीं किया गया और बकाया एरियर्स सहित अन्य सेवा लाभ भी नहीं दिए गए। तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने के बाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। बेनेडिक्ट एक्का वर्ष 1975 में नायब तहसीलदार के पद पर नियुक्त हुए थे। वर्ष 2009 में भैयाथान में पदस्थ रहते हुए सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार उनके पति को नियमानुसार समयमान अथवा क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए था। इसी आधार पर वेतन का पुनर्निर्धारण कर एरियर्स और संशोधित पेंशन देने की मांग की गई है। अब हाईकोर्ट ने सरगुजा कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पांच सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट आदेश के अनुपालन की स्थिति और कमिश्नर के जवाब पर विचार करेगा।
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