CG BREAKING: हाईकोर्ट में कांग्रेस नेता बृजमोहन सिंह की जमानत पर सुनवाई, फैसला 4 सितंबर तक सुरक्षित
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा मामला बुधवार को उच्च न्यायालय बिलासपुर में सुनवाई के लिए आया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बृजमोहन सिंह की जमानत याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिंन्हा की न्यायालय में बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला गुरुवार 4 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया है।
फेसबुक पोस्ट पर मचा विवाद
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता बृजमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पर की गई कथित फेसबुक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही वे पिछले तीन महीनों से केंद्रीय जेल दुर्ग में बंद हैं।
अदालत में हुई बहस
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि बृजमोहन सिंह का फेसबुक पोस्ट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है और इसके लिए उन्हें जेल में रखना न्यायोचित नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि फेसबुक पोस्ट में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई है, इसलिए मामले को गंभीर मानते हुए जमानत न दी जाए। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिंन्हा ने दोनों पक्षों की दलीलें ध्यान से सुनीं और कहा कि मामले के सभी तथ्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद ही आदेश जारी किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अपना फैसला 4 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया।
कांग्रेस खेमे की नजर
इस मामले पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें टिकी हुई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि बृजमोहन सिंह को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया है। वे इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए लगातार उनका समर्थन कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को गंभीर अपराध बताया है और कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
फैसला तय करेगा राजनीतिक माहौल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले का असर छत्तीसगढ़ की राजनीति पर गहराई से पड़ेगा। यदि हाईकोर्ट से बृजमोहन सिंह को राहत मिलती है तो कांग्रेस इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में पेश करेगी। वहीं, जमानत याचिका खारिज होने पर पार्टी को राजनीतिक रूप से झटका लग सकता है।