CG BREAKING: ऑनलाइन सट्टा गिरोह का मास्टरमाइंड दीप सिन्हा पुणे से गिरफ्तार

छग

Update: 2026-01-20 14:18 GMT
जनता से रिश्ता की खबर असर, हमारी खबर सच निकली
13 साल का अभियान रंग लाया, जनता से रिश्ता की खबर सच साबित
ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ जनता से रिश्ता की जंग, मास्टरमाइंड गिरफ्त में
हमारी खबर का असर: सट्टा किंग आयुष सिन्हा आखिरकार गिरफ्तार
सट्टा नेटवर्क पर प्रहार, जनता से रिश्ता की रिपोर्ट के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
जनता से रिश्ता का असर दिखा, करोड़ों के ऑनलाइन सट्टे का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Surguja. सरगुजा। 
छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क चलाने वाले फरार मास्टरमाइंड आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा को सरगुजा पुलिस ने महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी पर म्यूल अकाउंट खुलवाकर करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन और ऑनलाइन सट्टा संचालन का गंभीर आरोप है। वह बीते करीब डेढ़ से दो साल से फरार चल रहा था। सरगुजा न्यायालय द्वारा उसे भगोड़ा घोषित कर उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया गया था। यह पूरा मामला अंबिकापुर के कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा लंबे समय से सरगुजा जिले सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों और अन्य राज्यों में संगठित तरीके से ऑनलाइन सट्टा गिरोह संचालित कर रहा था। 13 मई 2024 को अंबिकापुर सीएसपी कार्यालय की टीम ने जयस्तंभ चौक के पास एक मकान में छापा मारकर ऑनलाइन सट्टा खेलते हुए गिरोह के कुछ सदस्यों को रंगे हाथों पकड़ा था। कार्रवाई के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी स्काई एक्सचेंज नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का लिंक भेजकर आईपीएल मैचों पर सट्टा खिलवा रहे थे।
उस समय गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच चल रहे टी-20 मैच पर ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जा रहा था। जांच में आयुष सिन्हा के साथ अमित मिश्रा, शुभम केशरी और अन्य साथियों की संलिप्तता सामने आई। पुलिस ने इस मामले में ऋतिक मंदिलवार, नितिन यादव, अमित कुमार मिश्रा, ध्रवील पटेल, मुकेश त्रिपाठी और सत्यम केशरी को गिरफ्तार किया था। इनके पास से बड़ी संख्या में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और सट्टा संचालन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए थे।
हालांकि, कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी आयुष सिन्हा फरार होने में सफल हो गया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की। जांच आगे बढ़ने पर यह भी सामने आया कि आरोपियों ने दूसरे लोगों के आधार कार्ड और पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाए थे। इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल सट्टा खेलने, पैसों के लेनदेन और अवैध कमाई को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए कूटरचना), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग), 120(बी) (आपराधिक षड्यंत्र) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) व 66(डी) के तहत प्रकरण दर्ज किया था। लंबे समय तक फरार रहने के कारण न्यायालय ने आयुष सिन्हा को भगोड़ा घोषित कर दिया था। फरार मुख्य सटोरिए की गिरफ्तारी के लिए सरगुजा एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल ने विशेष निर्देश जारी किए थे। इसके बाद अंबिकापुर सीएसपी राहुल बंसल के नेतृत्व में साइबर सेल और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए साइबर सेल ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस की, जो महाराष्ट्र के पुणे में पाई गई।
लोकेशन कन्फर्म होने के बाद पुलिस टीम पुणे रवाना हुई और वहां से आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा को हिरासत में लिया गया। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर अंबिकापुर लाया गया, जहां पूछताछ के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस अब उससे नेटवर्क, पैसों के लेनदेन और अन्य राज्यों में फैले सट्टा गिरोह के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर रही है। सरगुजा पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन सट्टा और साइबर अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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