Sukma. सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से शनिवार सुबह एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। मिनपा कैंप में तैनात सीआरपीएफ की 2वीं बटालियन के जवान शशि भूषण कुमार ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे कैंप में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी जवानों ने तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी और जवान को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
छुट्टी से लौटने के बाद उठाया आत्मघाती कदम
मिली जानकारी के अनुसार मृतक जवान हाल ही में छुट्टी काटकर अपने घर से लौटा था और कुछ ही दिन पहले उसने अपनी ड्यूटी ज्वाइन की थी। बताया जा रहा है कि ड्यूटी पर लौटने के बाद से वह चुप-चुप सा रहता था। हालांकि आत्महत्या की असली वजह अब तक सामने नहीं आ पाई है। मौके से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है।
गोली चलते ही मचा हड़कंप
सुबह के समय अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर कैंप में अफरा-तफरी मच गई। जब साथी जवान दौड़कर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि शशि भूषण कुमार खून से लथपथ जमीन पर गिरा हुआ है। तत्काल सीनियर अधिकारियों को जानकारी दी गई और उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
लगातार बढ़ रही जवानों की आत्महत्या की घटनाएं
छत्तीसगढ़ में तैनात अर्धसैनिक बलों के बीच आत्महत्या की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। 30 जुलाई 2025 को भी नक्सलगढ़ इलाके में सीआरपीएफ 22वीं बटालियन के जवान पप्पू यादव ने खुदकुशी कर ली थी। वह बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला था और उसने अपनी इंसास रायफल से खुद को गोली मार ली थी। उस समय भी आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था। इसी तरह 13 जुलाई 2025 को रायपुर में सीआरपीएफ की 65वीं बटालियन के जवान मुरली ने कैंप में आत्महत्या कर ली थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मुरली पर बढ़ते कर्ज का बोझ और पारिवारिक जिम्मेदारियों का दबाव था, जिससे वह तनाव में आ गया और आत्मघाती कदम उठा लिया।
मानसिक तनाव बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि जवानों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह मानसिक तनाव है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनाती, घर से दूर रहना, पारिवारिक समस्याएं और छुट्टी न मिलना प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई बार जवान अपनी समस्याएं साझा नहीं कर पाते और तनाव में आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।
अफसरों ने जताया दुख, जांच शुरू
मिनपा कैंप की इस घटना के बाद सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जाएगा कि आखिर जवान ने यह कदम क्यों उठाया। साथ ही यह भी प्रयास किया जाएगा कि जवानों में तनाव को कम करने के लिए और प्रभावी उपाय किए जाएं। लगातार हो रही आत्महत्याओं ने जवानों की भलाई और कैंप में उनके मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बार-बार सामने आने वाली इन घटनाओं से साफ है कि जवानों को तनाव से बाहर निकालने के लिए केवल सुरक्षा इंतजाम ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहयोग की भी जरूरत है।
नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों का संघर्ष
सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे इलाकों में तैनात जवान हर पल नक्सल हमलों के खतरे से जूझते रहते हैं। दिन-रात की ड्यूटी, लगातार सतर्कता और जोखिम भरा माहौल जवानों को थका देता है। ऐसे हालात में यदि मानसिक सहयोग और उचित छुट्टियां नहीं मिलतीं, तो तनाव का स्तर और बढ़ जाता है।