CG BREAKING: आबकारी घोटाले मामले में अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को मिली जमानत
फिर भी नहीं आ सकेंगे जेल से बाहर
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में बड़ी न्यायिक हलचल सामने आई है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने लंबे समय से जेल में बंद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर को जमानत प्रदान कर दी है। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने यह आदेश जारी किया। इस फैसले को मामले में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। अदालत में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा और शशांक मिश्रा ने पैरवी की। जानकारी के अनुसार, मामले की पूर्व में विस्तृत सुनवाई हो चुकी थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को आदेश सुनाते हुए सिंगल बेंच ने अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, यश पुरोहित, नितेश पुरोहित और दीपेंद्र चावला को जमानत दे दी।
22 महीने से थे जेल में बंद
पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर सहित अन्य आरोपी करीब 22 माह से न्यायिक हिरासत में थे। सत्र न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां पहले भी उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। हालांकि, पांच महीने बाद पुनः हाईकोर्ट में जमानत आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई थी। उसी आधार पर दोबारा दायर याचिका पर अब यह राहत आदेश आया है।
जेल से तुरंत नहीं मिल सकेगी रिहाई
हालांकि जमानत आदेश के बावजूद अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने दोनों को 550 करोड़ रुपए के कथित डीएमएफ घोटाले में भी आरोपी बनाया है। उस मामले में जमानत न मिलने के कारण उनकी रिहाई पर रोक बनी रहेगी। जबकि नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला और यश पुरोहित के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है 3200 करोड़ का आबकारी घोटाला?
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल (2019-2023) के दौरान शराब नीति में बदलाव को लेकर यह कथित घोटाला सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच में दावा किया कि शराब नीति को इस प्रकार बदला गया, जिससे कुछ विशेष आपूर्तिकर्ताओं को लाभ पहुंचे। आरोप है कि अधिकारियों और नेताओं का एक सिंडिकेट बनाकर 3200 करोड़ रुपए का घोटाला अंजाम दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, नकली होलोग्राम और सील तैयार कर महंगी शराब की बोतलें सरकारी दुकानों के माध्यम से बेची गईं। यह होलोग्राम कथित रूप से नोएडा की एक कंपनी से बनवाए गए थे। चूंकि ये नकली थे, इसलिए बिक्री का पूरा रिकॉर्ड शासन तक नहीं पहुंचता था और एक्साइज टैक्स दिए बिना शराब की बिक्री होती रही। बताया जाता है कि इस प्रक्रिया से राज्य शासन को करीब 2165 करोड़ रुपए के टैक्स का नुकसान हुआ। आरोप यह भी है कि घोटाले से अर्जित राशि का उपयोग राजनीतिक और अन्य गतिविधियों में किया गया।
किन-किन पर हुई कार्रवाई
मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर सहित कई कारोबारी और अधिकारी आरोपी बनाए गए थे। आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ईडी की कार्रवाई के बाद उसके पत्र के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भी एफआईआर दर्ज की थी। जांच में नितेश पुरोहित, अरविंद सिंह, दीपेंद्र चावला और सौम्या चौरसिया सहित अन्य नाम भी सामने आए थे।
राजनीतिक और कानूनी असर
आबकारी घोटाला छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित मामला रहा है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने इसे बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए तत्कालीन सरकार पर निशाना साधा था, जबकि कांग्रेस ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। अब हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद मामले में कानूनी लड़ाई का नया चरण शुरू होगा। हालांकि अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर ही होगा।