CG BREAKING: रीएजेंट खरीदी घोटाले में ACB–EOW की बड़ी कार्रवाई, मार्केटिंग हेड गिरफ्तार

छग

Update: 2026-01-22 14:09 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में सामने आए 500 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित रीएजेंट खरीदी घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने एक और बड़ी गिरफ्तारी की है। संयुक्त कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसियों ने डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुंबई के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपी को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में प्रस्तुत किया गया, जहां से 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड मंजूर की गई है। एसीबी-ईओडब्ल्यू द्वारा इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 120(बी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 13(1)(ए) सहपठित 13(2) एवं 7(सी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला राज्य की ‘हमर लैब योजना’ के तहत मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की खरीदी से जुड़ा हुआ है, जिसमें शासकीय राशि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के प्रमाण सामने आए हैं।
विवेचना में यह तथ्य उजागर हुआ है कि मेडिकल उपकरणों के लिए उपयोग होने वाले रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स के लिए डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पहले से ही एक निश्चित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय किया गया था। इसके बावजूद आरोपी कुंजल शर्मा ने कंपनी की आंतरिक पॉलिसी और नियमों की अनदेखी करते हुए मोक्षित कॉर्पोरेशन को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से षड्यंत्र रचा। जांच में सामने आया है कि कुंजल शर्मा ने शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर साजिशन डायसिस कंपनी की ओर से छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) को रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स के लिए एमआरपी से कहीं अधिक दर और शर्तें अनधिकृत रूप से भेजीं। इस कार्रवाई के चलते निविदा प्रक्रिया में CGMSC ने मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा प्रस्तुत मनमाने और अत्यधिक दरों को मान्य कर लिया।
इसके परिणामस्वरूप मोक्षित कॉर्पोरेशन ने CGMSC को वास्तविक एमआरपी से दो से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की। इस प्रक्रिया के माध्यम से शासकीय राशि का भारी दुरुपयोग किया गया और करोड़ों रुपये का अनुचित भुगतान प्राप्त किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से रचा गया, जिसमें निजी कंपनियों और कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों की मिलीभगत स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। एसीबी-ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान कई अहम दस्तावेज, ईमेल संवाद और लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आने की संभावना है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से यह भी पूछा जाएगा कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं, तथा किस स्तर पर निर्णय लेकर एमआरपी से अधिक दरों को मंजूरी दिलाई गई।
जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि ‘हमर लैब योजना’ के तहत शासकीय राशि के दुरुपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। अब तक की विवेचना में यह संकेत मिले हैं कि यह घोटाला केवल एक व्यक्ति या एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई स्तरों तक जुड़े हो सकते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी संभव हैं। एसीबी-ईओडब्ल्यू ने यह भी कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। एजेंसियों का जोर इस बात पर है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे और जनहित की योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा न जाए। गौरतलब है कि ‘हमर लैब योजना’ का उद्देश्य राज्य के सरकारी अस्पतालों में सस्ती और सुलभ जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन इस घोटाले ने योजना की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में एसीबी-ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को स्वास्थ्य विभाग से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार के पर्दाफाश के रूप में देखा जा रहा है।
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