Surguja. सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि भूमाफियाओं ने सरकारी अमले की कथित मिलीभगत से बांकी डैम की नहर और आसपास की बेशकीमती शासकीय जमीन पर कब्जा कर प्लॉटिंग की और जमीनें बेच दीं। पिछले करीब 10 वर्षों में यहां एक से लेकर सात मंजिल तक की इमारतें खड़ी हो गईं। अब कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर प्रशासन ने सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए बड़ी कार्रवाई शुरू की है। पिछले तीन दिनों से लगातार बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं। अब तक 30 बड़े कब्जे हटाए जा चुके हैं, जबकि 200 कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
11 किलोमीटर लंबी नहर की जमीन पर कब्जे का खेल
जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने वाले बांकी डैम की करीब 11 किलोमीटर लंबी नहर ग्राम सोहगा तक जाती है। आरोप है कि वर्ष 2016 से भूमाफियाओं और प्रभावशाली लोगों ने इस नहर की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा करना शुरू किया। नहर की मुख्य जमीन करीब 120 फीट यानी 36 मीटर चौड़ी और 60 फीट गहरी बताई गई है। इसमें करीब 18 मीटर तक जमीन पर कब्जा कर लिया गया। इतना ही नहीं, 16 मीटर चौड़ी सब-माइनर नहर को अतिक्रमण के कारण महज चार मीटर की नाली में तब्दील कर दिया गया। सरकारी जमीन पर अवैध प्लॉटिंग कर भूखंड बेचने और पक्के निर्माण कराने के आरोप भी सामने आए हैं।
तीन दिनों से गरज रहा बुलडोजर, 30 बड़े कब्जे हटाए
कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर राजस्व विभाग ने जमीन का सीमांकन कराया। इसके बाद सरकारी भूमि पर बने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। 13 अक्टूबर से करीब आधा दर्जन जेसीबी मशीनों और 40 कर्मचारियों की टीम को कार्रवाई में लगाया गया है। मंगलवार और बुधवार को प्रशासन ने करीब एक किलोमीटर के दायरे में बने 23 मकानों का कब्जा हटाया। इसके बाद गुरुवार को प्रभावशाली लोगों से जुड़ी बताई जा रही सात पांच मंजिला इमारतों पर भी बुलडोजर चलाया गया। इस तरह अब तक कुल 30 बड़े अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त कराने तक कार्रवाई जारी रहेगी।
200 कब्जाधारियों को नोटिस, आगे भी चलेगा बुलडोजर
प्रशासन ने नहर की जमीन पर कब्जा करने वाले करीब 200 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस के माध्यम से कब्जाधारियों को जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई के दौरान कई कब्जाधारियों ने विरोध भी किया। कुछ स्थानों पर हंगामे की स्थिति बनी, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासनिक टीम ने अभियान जारी रखा। बताया गया कि राजनीतिक दबाव और विरोध के बावजूद सरकारी जमीन से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य नहर की पूरी सरकारी जमीन को वापस अपने कब्जे में लेना है।
सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर खुला मामला
इस मामले में अंबिकापुर के सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम की शिकायत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने बांकी डैम की सब-माइनर नहर पर किए गए कब्जों को हटाने और शासकीय जमीन को सुरक्षित रखने की मांग करते हुए कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी। परवेज आलम ने अपनी शिकायत के साथ जमीन से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने संबंधित अधिकारियों को जमीन का सीमांकन कराने के निर्देश दिए। सीमांकन के बाद सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति सामने आई, जिसके आधार पर कब्जे हटाने का अभियान शुरू किया गया।
2016 से जारी था कब्जा, विभाग को पहले भी मिली शिकायत
भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि नहर की जमीन पर कब्जा अचानक नहीं हुआ, बल्कि सुनियोजित तरीके से वर्षों तक अतिक्रमण किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से नहर की जमीन पर कब्जे का सिलसिला चल रहा था। इस संबंध में वर्ष 2021 में जल संसाधन विभाग को लिखित शिकायत भी की गई थी। आलोक दुबे के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच जल संसाधन विभाग के दो कार्यपालन अभियंताओं ने एसडीएम और तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार पत्र लिखे, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे सरकारी जमीन पर कब्जे लगातार बढ़ते गए और वहां बड़े-बड़े भवनों का निर्माण हो गया।
नहर में पानी नहीं आने का उठाया फायदा
बांकी डैम का पानी वर्तमान में सिंचाई के बजाय अंबिकापुर शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है। काफी समय से डैम का पानी नहरों में नहीं छोड़ा जा रहा है। डैम से पानी नगर निगम के तकिया प्लांट में पहुंचता है, जहां से शहर के घरों तक पेयजल सप्लाई की जाती है। नहरों में लंबे समय तक पानी नहीं आने के कारण संबंधित जमीन खाली पड़ी दिखाई देने लगी। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर भूमाफियाओं ने धीरे-धीरे जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया। हालांकि, नहर का उपयोग नहीं होने के बावजूद उसकी जमीन कानूनी रूप से जल संसाधन विभाग की ही है।
सरकारी जमीन पर प्लॉटिंग कर बेच दिए भूखंड
सीमरन होटल से सांसद चिंतामणि महाराज के घर की ओर जाने वाली करीब 18 मीटर चौड़ी माइनर नहर कच्ची थी। जमीन पर स्पष्ट मार्किंग नहीं होने का फायदा उठाकर अलग-अलग स्थानों पर कब्जे किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि बांकी जलाशय की माइनर नहर की जमीन पर खुलेआम प्लॉटिंग की गई और भूखंड बेच दिए गए। इसके बाद खरीदारों ने वहां करोड़ों रुपये की लागत से पक्के मकान और बहुमंजिला इमारतें बना लीं। इस मामले ने सरकारी भूमि की निगरानी और अतिक्रमण रोकने में संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
SDM बोले- पूरी सरकारी जमीन कराई जाएगी कब्जामुक्त
एसडीएम बान सिंह नेताम ने बताया कि सीमांकन के बाद 36 मीटर चौड़ी नहर की जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि कब्जाधारियों को पहले नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। एसडीएम के अनुसार, सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से नहर की जमीन पर कब्जा करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।