एक बार आजा-आजा की तर्ज पर दिखा रहे हैं नजारा
देश के दूसरे राज्यों के साथ विदेशी बालाओं का सुरक्षित ठिकाना बना छत्तीसगढ़
होटल, क्लब, पब, फार्महाउस में नंगाई की सूटिंग के साथ यूट्यूब में रील बनाकर कस्टमरों को कर रहे आमंत्रित
भाठागांव, पुराना धमतरी रोड के फार्म हाऊसों में सबसे अधिक नंगी पार्टी का आयोजन
राजिम, अभनपुर रोड के फार्म हाऊसों में ब्लू फिल्म की शूटिंग और नंगे -नंगे वीडियो एलबमों की शूटिंग आम बात
वीआईपी रोड ,धरमपुरा , मंदिर हसौद तक के फार्म हाऊसों में रातें रंगीन करने के सभी सामान उपलब्ध
देश में सबसे चर्चित सेक्स मार्केट में रायपुर का नाम प्रमुखता के साथ अव्वल दर्जे
में आया, होटलों में नंगी पार्टी और फार्म हाऊसों की उपलब्धता के कारण
परदेशी छुटभैया नेताओं ने छत्तीसगढ़़ को वैश्यागढ़ बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी , सभी फार्म हाउसों के मालिक खुले तौर पर बोलते हैं कि नेता हमारे जेब में, नाड़ा-पजामा छाप नेताओं की भरमार
रायपुर । सोशल मीडिया में कमाई करने का रंगीन तरीका देश भर की माड़ल बालाओं को मिल गया है। खासकर राजधानी सहित पूरे प्रदेश में यूट्यूब में नंगी -नंगी रील बनाकर अंगों का प्रदर्शन की डांस करती लड़किया यूट्यूब में डालकर कस्टमर को आमंत्रित करती है। रायपुर के फार्म हाउस और होटलों, पब , क्लबों को ठिकाना बना रखा है। रायपुर में इस समय 300 विदेशी और दूसरे राज्यों की लड़किय़ां पूरे छत्तीसगढ़ में रह रही है। जो गुवाहटी, दिल्ली, पूना, नोयडा , हैदराबाद, गाजियाबाद, जयपुर सहित पूरे 28 प्रदेशों की ग्रामीण परिवेश की माडल लड़कियों ने छत्तीसगढ़ को सुरक्षित ठिकाना बना रखा है। जितने भी फार्म हाउस है उसमें पार्टी , सूटिंग के नाम पर खुलेआम न्यूड फोटो खीचकर यूट्यूब में डलवा रही है। और कस्टरों को आकर्षित करने के साथ पता देकर आमंत्रित भी करती है।
देश का सबसे बड़ा वैश्यालय
भारत का सबसे बड़ा वैश्यालय बनाने वाले दलालों पर किसी की नजर नहीं है, नजर है भी तो दानापानी के चक्कर में नजरअंदाज करने पर मजबूर है। होटेल, पब, फार्म हाउस , पार्टी लान, और बड़े -बड़े होटलों और क्लबों को प्रमुख ठिकाना बनाय़ा है। महीने में 15 दिनों का उत्सव यहां आयोजित होता है। शुक्रवार से शुरू होकर सोमवार को समापन होता है। वो भी पूरी रंगीनियत के साथ नंगाई की सारी सीमाएं यहां दी जाती है। कस्टर की खुशी और कमाई के लिए ये लड़किय़ां कुछ भी करने को तैय़ार रहती है। बस नोट दिखना चाहिए जो देखना है कस्टमर देख सकता है। हर अंग के प्रदर्शन का अलग -अलग चार्ज रखा गया है। पैसे का सवाल है जिताना खर्च करोगे उतना इंजाय मिलेगा।
रायपुर जब से राजधानी का स्वरूप लिया है तब से उसकी नजाकत कुछ अलग ही ढंग से बदल गई है। कभी संस्कार और संस्कृति गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा के लिए जाना जाता था अब तो फूड़हता के लिए पूरे भारत में जाना जाते लगा है। देश भर के काल गर्ल और विदेशी बालाओ का स्थायी ठिकाना बन गया है। टाटीबंध- तेलीबांधा से शुरू होकर सड्डू मोवा, वीवीआईपी रोड, स्टेशन रोड की पहचान अब लक्जरी इंटरटेैनमेंट के लिए जाना जाने लगा है। रायपुर में अपसंस्कृति इतनी तेजी से फैली है कि देखते ही देखते हर होटल में मसाज से लेकर डांस बार ने तहलका मचा दिया है। विदेशी के अलावा दूसरे राज्यों के रइसजादे राय़पुर को एशगाह समझ कर रायपुर की रंगीनिय़त का भरपूर मजा उठाने आ रहे है। कुछ माह पहले होटलों और स्पा सेंटरों संदिग्ध स्थिति में मिले युवक युवतियों से पूछताछ में बताया कि हम लोग यहां इंटरटेैंनमेंट के लिए आते हमें फोन और एसएमएस कर बुलाया जाता है। वही विदेशी और दूसरे राज्यों से आई युवतियों ने पुलिस को बताया कि हम लोग तीन दिन एक सप्ताह के पेकेज में आते है। हमें 10-20 हजार दिया।
तेलीबांधा -वीआईपी रोड, सड्डू -मोवा स्टेशन रोड के होटलों में पार्टी सेलिब्रशन या इंटरटेनमेंट के नाम से देह व्यापार का रैकेट चलाने वाले ने तेलीबांधा औऱ वीआईपी रोड के साथ नया ठिकाना ढूंढ कर कमाई का नया जरिया बना लिया है। तेलीबांधा और वीआईपी रोड में चलने वाले गोरखधंधा को भी पीछे नहरपारा झूलेलाल चौक के के होटल वालों ने छोड़ दिया है। रेलवे स्टेशन रोड औऱ केके रोड के बीच की लाइन नहर पारा झूलेलाल चौक के ढलान में स्थित होटलों में जमकर सटर्डे - संडे को दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक डांस पार्टी के नाम पर दूसरे राज्यों की लड़किय़ों लाकर डांस के नाम पर दैहिक शोषण का खेल चल रहा है। नहर पारा की सकरी गलियों में किसी की नजर नहीं पड़ती और आसानी से होटलों में शौकीनों की फरमाइश पर नंगा नाच का खेला कर रहे है। नहर पारा झूलेलाल चौक में श्री गणेश, एलवी पैलेस, सागर योयो में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं होने के बाद भी ग्राहकों को पैदल चलकर आना कुछ न तो कुछ तो बात होने की शंका को जन्म देता है। होटल वाले बड़ी होशियारी से अपनी गाडिय़ों से ग्राहक को होटल तक लाते है, और वापस उनके ठिकाने पर छोड़ आते है । वहां पर वहीं पुरानी सीजी 04 की गाडिय़ां खड़ी रहती है। जिसके कारण किसी को शक नहीं होता कि यहां क्या चल रहा है। लेकिन होटल के आसपास रहने वाले हर सटर्डे- संडे को चलने वाली पार्टियों से हलाकान है। पुलिस नहर पारा से सायरन बजाते निकल जाती है लेकिन नीचे ढालन में जहां ये तीनों होटल है यहां ग्राहकों की डिमांड पर तीनों होटलों में लड़किय़ों को एख दूसरे होटल में डिमांड के अनुसार पहुंचाय़ा जाता है वहां तीनों होटलों में आपसी सहमति बना हुआ है। उसके हिसाब से लड़कियों को होटलों में डांस के लिए भेजा जाता है।
शौकीनों की सजती है महफिल
जानकारों और मोहल्लेवासिय़ों की माने तो इन होटलों में हर शनिवार औऱ रविवार को शौकनों को मेला लगा रहता है। जन्म दिन पार्टी शादी की साल गिरह औऱ मोटिवेशन क्लास के नाम पर यहां पर गोरख धंधा जमकर चल रहा है। इन होटलों में दूसरे राज्यों के साथ लोकल शौकीन भी इंजाय करने आते है। जिससे इन बंद होते होटलों के मालिकों को देह व्य़ापार का कमाई का धंधा मिल गया है। होटल मालिक जमकर कमाई कर रहे है। इन होटलों में शनिवार और संडे को दोपहर 12 बजे से देर रात गाने बजाने की आवाज आते रहती है। लोग फुल साउंड में म्यूजिक बजाकर वहां क्या हो रहा है इन गतिविधियों को छुपाने के लिए कानफोडू साउंड बजाकार लीपापोती कर रहे है। शराब औऱ शबाब के शौकीनों महफिल में सैकड़ों लोग इंजाय़ करने आते है। जमकर जाम छलकाने के बाद मनपंसद नचनिया को ग्राहकों के हवाले कर दिया जाता है।
डांस का झांसा देकर लाया जाता है लड़किय़ों को
नहरपारा झूलेलाल चौक की होचलों में देर रात ग्राहकों की आवाजाही देखी जा सकती है। सकरी गली होटल होने का फायदा होटल वाले उठा रहे है। यहां पुलिस की गाड़ी पहुंच ही नहीं पाती है। औऱ यदि पहुंच भी जाती है तो होटल वालों ने गंज पुलिस के ही एक जवान को थाने से सेटिंग की जिम्मेदीरी सौैंप रखी है। वो पुलिस वाला टीआई और सीएसपी से सेटिंग कर मामले को रफा-रफा करवाने का ठेका ले रखा है।
किराए में देकर चलवा रहे हैं होटल
वीवीआईपी रोड और तेलीबांधा क्षेत्र में होटल-ढाबों में काम करने वाले दो लडक़े जो कुक और वेटरबंद हुआ करते थे वो नहरपारा के होटलों को बंद होते देख होटल के मालिक से किराए पर लेकर हर रोज लाखों की कमाई कर रहे । सब खर्च काटकर फायदा देख होटल मालिक अपने ही होटल के पार्टनर बन गए है। होटल को चलते देख होटल मालिकों के मन में भी बड़ी कमाई को देखकर अब खुद आकर होटल में बैठने लगे है। जबकि पहले एक दो साल तक तो किराए से मतलब रखते थे, लेकिन अब कमाई आने का रास्ता देखते ही होटल में बैठने लगे है।