Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे से जुड़ी एक और दुखद खबर सामने आई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल बैमा निवासी पवन गढ़वाल ने इलाज के दौरान सोमवार सुबह दम तोड़ दिया। उनकी मौत के साथ ही इस भीषण रेल दुर्घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। बताया जा रहा है कि पवन गढ़वाल हादसे के दिन नैला स्टेशन से कोरबा-बिलासपुर एमईएमयू लोकल ट्रेन में सवार हुए थे। दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और बीते एक सप्ताह से उनका इलाज बिलासपुर के CIMS अस्पताल में चल रहा था।
4 नवंबर को हुआ था भयावह रेल हादसा
यह हादसा 4 नवंबर की शाम करीब 6 बजे हुआ था, जब कोरबा-बिलासपुर मार्ग पर चल रही एमईएमयू लोकल ट्रेन गतोरा और लालखदान स्टेशन के बीच खड़ी एक मालगाड़ी से भीषण रूप से जा टकराई थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एमईएमयू ट्रेन के आगे के तीन डिब्बे पटरी से उतरकर मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गए, जिससे कई यात्री डिब्बों में फंस गए थे। टक्कर की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने में मदद की। कुछ ही मिनटों में रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें राहत-बचाव के लिए मौके पर पहुंच गईं। ऑपरेशन देर रात तक चला और दर्जनों यात्रियों को किसी तरह सुरक्षित निकाला गया।
सिग्नलिंग त्रुटि या मानवीय गलती की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि हादसा सिग्नलिंग सिस्टम की त्रुटि या मानवीय गलती की वजह से हो सकता है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, जिस ट्रैक पर मालगाड़ी खड़ी थी, उसी पर एमईएमयू ट्रेन को क्लियरेंस दे दिया गया था। हालांकि रेलवे अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। रेल मंत्रालय ने हादसे के तुरंत बाद एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित की थी। यह टीम अब सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक की तकनीकी स्थिति, इंजन रिकॉर्ड और चालक के नियंत्रण तंत्र की विस्तृत जांच कर रही है।
घायलों का इलाज जारी, कई की हालत गंभीर
हादसे में घायल हुए यात्रियों को CIMS बिलासपुर और अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से कई की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ यात्रियों को सिर, रीढ़ और पैर में गहरी चोटें आई हैं। मृतकों में ज्यादातर यात्री कोरबा, जांजगीर-चांपा और बिलासपुर जिलों के निवासी हैं। पुलिस ने अस्पताल में घायलों के परिजनों के लिए सहायता काउंटर भी बनाया है। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को जल्द मुआवजा और अन्य सहायता राशि उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया है।
सरकार ने जताया दुख, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया था और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई थी। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सभी घायलों के इलाज में कोई कोताही न बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना है। राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है और हर संभव मदद सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने रेल मंत्रालय से भी आग्रह किया कि इस हादसे की जांच पूरी पारदर्शिता और तकनीकी दृष्टिकोण से की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
स्थानीय लोगों की मदद से बचाई गई कई जानें
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद गतोरा और लालखदान स्टेशन के बीच ग्रामीणों ने सबसे पहले राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने डिब्बों में फंसे यात्रियों को निकालने में पुलिस और एनडीआरएफ की मदद की। कई लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त ट्रेन की रफ्तार काफी तेज थी और अचानक टक्कर से अधिकांश यात्री अपने सीट से उछल गए। कुछ यात्रियों ने ट्रेन की टक्कर महसूस होते ही दरवाजों से कूदकर जान बचाई, हालांकि कई लोग अंदर ही फंसे रह गए।
रेलवे कर रहा व्यापक तकनीकी मूल्यांकन
रेलवे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच में सिग्नलिंग रिकॉर्ड, इंजन डेटा और चालक की कॉल लॉग की समीक्षा की जा रही है। साथ ही, रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने भी दुर्घटनास्थल का दौरा किया और मौके से तकनीकी साक्ष्य जुटाए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, टक्कर के समय ट्रेन की गति 70-80 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास थी। इतनी तेज गति में खड़ी मालगाड़ी से टकराने के कारण ट्रेन के पहले तीन कोच पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
अब तक 13 की मौत, जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा
अब तक इस दुर्घटना में 13 यात्रियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हैं। हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद रेलवे विभाग जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करेगा। इस बीच, हादसे से उबर रहे कई यात्री अब भी सदमे में हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने घायलों और मृतकों के परिवारों को मदद पहुंचाने की पहल की है।