नक्सल विरोधी अभियान: जवानों ने बरामद किए आईईडी और नक्सली सामग्री, स्मारक ध्वस्त

छग

Update: 2026-03-15 13:56 GMT
Pakhanjhur. पखांजूर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और राज्य के जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ती जा रही है। हाल ही में कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में डीआरजी और बीएसएफ की संयुक्त टीम ने नक्सलियों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की। यह कार्रवाई राज्य में नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, 15 मार्च को डीआरजी और बीएसएफ की संयुक्त टीम छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में सर्चिंग अभियान के लिए रवाना हुई। जवानों ने हापाटोला और बीनागुंडा के जंगल-पहाड़ी इलाके में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए डंप का पता लगाया। इस डंप में कई प्रकार की खतरनाक सामग्रियाँ मौजूद थीं, जिनमें प्रेशर कुकर आईईडी, पाइप आईईडी, नक्सली वर्दी, फटाखा और नक्सल साहित्य शामिल थे।
सुरक्षा के लिहाज से बरामद आईईडी को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया। इसके साथ ही जवानों ने ग्राम कलपर और आमाटोला में बनाए गए चार नक्सली स्मारकों को भी ध्वस्त किया। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई न केवल नक्सलियों की मनोवैज्ञानिक ताकत को कमजोर करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सतर्कता और प्रभावी कार्रवाई का भी उदाहरण है। विस्तृत जानकारी के अनुसार, जवानों ने डंप से तीन प्रेशर कुकर आईईडी बरामद किए, जिनमें एक 10 किलो का और दो 5-5 किलो के थे। इसके अलावा एक पाइप आईईडी, बिजली वायर का बंडल और तीन नक्सली वर्दियां भी बरामद की गई। नक्सलियों की अन्य सामग्रियों में फटाखा और नक्सली साहित्य शामिल थे। सभी आईईडी को प्रशिक्षित जवानों द्वारा सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया।
सर्चिंग अभियान के दौरान डीआरजी और बीएसएफ की टीम ने इलाके में पूरी सतर्कता बरती। नक्सलियों की संभावित गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए जवानों ने न केवल सामग्री बरामद की, बल्कि नक्सलियों द्वारा बनाए गए स्मारकों को ध्वस्त कर क्षेत्र की नक्सल विरोधी स्थिति मजबूत की। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैयारी और तत्परता का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बलों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य नक्सलियों की योजना और उनके ठिकानों को नुकसान पहुँचाना है। बरामद सामग्री में आईईडी जैसी खतरनाक वस्तुएँ शामिल थीं, जिन्हें नष्ट करने से इलाके की सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। साथ ही नक्सलियों के बनाए स्मारक ध्वस्त होने से उनका मनोबल कमजोर हुआ है।
सुरक्षा बलों की इस संयुक्त कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भी राहत की भावना है। ग्रामीणों का कहना है कि जवानों की सतर्कता और प्रभावी कार्रवाई से इलाके में शांति और सुरक्षा बनी हुई है। डीआरजी और बीएसएफ की टीम लगातार जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करती है। इस कार्रवाई को राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जवानों की मेहनत और सतर्कता से न केवल
खतरनाक आईईडी
और अन्य नक्सली सामग्री बरामद हुई, बल्कि नक्सलियों के बनाए हुए स्मारक भी ध्वस्त किए गए। सुरक्षा बलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में किसी भी तरह की नकारात्मक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और स्थानीय लोगों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। इस पूरे अभियान से यह संदेश भी जाता है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बल पूरी तरह से सतर्क हैं और किसी भी तरह की हिंसक गतिविधियों को नाकाम करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। जवानों की सफलता ने न केवल इलाके में सुरक्षा बढ़ाई है, बल्कि नक्सलियों के खिलाफ मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाया है।
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