Narayanpur. नारायणपुर। भारत सरकार के नीति आयोग के मार्गदर्शन में संचालित संपूर्णता अभियान 2.0 के अंतर्गत नारायणपुर जिले में पशु टीकाकरण दिवस का आयोजन किया गया। अभियान का उद्देश्य जिले में पशु टीकाकरण में संतृप्तता सुनिश्चित करना और पशुओं में बीमारियों की रोकथाम करना है। इस अवसर पर पशुधन विकास विभाग की टीम ने पशुपालकों के घर-घर जाकर और मोबाइल वेटनरी यूनिट के माध्यम से पशुओं का टीकाकरण किया। अभियान के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों जैसे गुदाड़ी, कुरूसनार, बेलगांव, एड़का, भीरागांव, रेमावंड, महिम्मगवाड़ी, बेड़माकोट, सोनपुर और तारागांव में सघन पशु चिकित्सा शिविर और पशुपालक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इन शिविरों और संगोष्ठियों में कुल 285 पशुपालकों के 2087 पशुओं का टीकाकरण किया गया।
इसके साथ ही 1980 पशुओं को कृमिनाशक दवापान प्रदान किया गया और 260 पशुपालकों को आवश्यक औषधियों का वितरण भी किया गया। पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को पशुओं की स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण के महत्व और पशु पालन के उचित तरीकों के बारे में जानकारी दी। पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में इस अभियान के माध्यम से पशु टीकाकरण की संतृप्ति हासिल कर ली गई है। इससे न केवल पशुओं में होने वाली बीमारियों की रोकथाम होगी, बल्कि पशुपालकों को भी आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिलेगा। अभियान के दौरान टीकाकरण और दवाओं के वितरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आयोजित किया गया और हर पशुपालक तक आवश्यक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई।
संपूर्णता अभियान 2.0 का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों के लिए भी जागरूकता बढ़ाने वाला है। पशुपालकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य देखभाल से पशुओं की उम्र बढ़ती है और उनकी उत्पादकता भी बढ़ती है। अभियान के दौरान पशु चिकित्सकों ने टीकाकरण का महत्व, संक्रमण की रोकथाम और पोषण के बारे में भी जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर जिले में भविष्य में भी इस तरह के पशु चिकित्सा शिविर और टीकाकरण अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि जिले में पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हो और पशुपालकों की आय और जीवन स्तर में वृद्धि हो सके। इस अभियान से यह संदेश मिलता है कि संपूर्णता अभियान 2.0 के माध्यम से नीति आयोग और जिला प्रशासन पशुओं के स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के महत्व को देखते हुए इस तरह के टीकाकरण दिवस और संगोष्ठियां समय-समय पर आयोजित की जाती रहेंगी।