Bemetra. बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के साजा क्षेत्र में एक किसान की सालभर की मेहनत उस समय राख में तब्दील हो गई, जब खेत में खड़ी गेहूं की फसल में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण लगी, जिसने कुछ ही समय में पूरी फसल को अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना ग्राम पंचायत तेंदूभाटा की है, जहां करीब ढाई से तीन एकड़ में लगी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। जानकारी के मुताबिक, किसान मानसिंह साहू ने रेघा पर ली गई जमीन में गेहूं की खेती की थी। खेत के मालिक अशोक साहू, सुनील, छोटेलाल, रामकुमार और सुखालू बताए जा रहे हैं। किसान ने कड़ी मेहनत से फसल तैयार की थी और कटाई के लिए पूरी तरह तैयार फसल को बस कुछ ही दिनों में घर लाने की उम्मीद थी, लेकिन अचानक लगी आग ने सब कुछ खत्म कर दिया।
पीड़ित किसान मानसिंह साहू ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने फसल को छोटे बच्चे की तरह पाल-पोसकर तैयार किया था। हर दिन खेत में मेहनत करने के बाद उन्हें अच्छी उपज की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम समय में यह हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि इस आगजनी से उन्हें करीब डेढ़ से दो लाख रुपए तक का नुकसान हुआ है, जो उनके जैसे छोटे किसान के लिए बहुत बड़ा झटका है। आग लगते ही किसान ने आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी। गांव के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। ग्रामीणों ने डंडों से आग को पीटकर और बाल्टियों से पानी डालकर किसी तरह आग पर काबू पाया। काफी मशक्कत के बाद आग को अन्य खेतों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे आसपास की फसलें बच गईं। घटना की जानकारी मिलते ही पटवारी दुर्गेश वर्मा मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया।
उन्होंने बताया कि आग में करीब 40 क्विंटल से अधिक उत्पादन की फसल जलकर नष्ट हो गई है। पटवारी द्वारा पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर शासन-प्रशासन को भेजी जा रही है, ताकि पीड़ित किसान को उचित मुआवजा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बिजली व्यवस्था की लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बिजली लाइनों की नियमित जांच और सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। पीड़ित किसान मानसिंह साहू ने प्रशासन से जल्द राहत राशि देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस नुकसान के बाद उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। यदि समय पर सहायता नहीं मिली, तो उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो सकती है। यह घटना एक बार फिर किसानों के सामने मौजूद जोखिम और चुनौतियों को उजागर करती है। प्राकृतिक और तकनीकी कारणों से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए ठोस व्यवस्था और त्वरित सहायता बेहद जरूरी है।