कोंडागांव: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए 15 अगस्त का दिन ऐतिहासिक बन गया। लंबे समय तक नक्सल प्रभाव और भय के साये में रहे अबूझमाड़ के 9 गांव में आजादी के बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल और रासमेटा गांवों में ग्रामीणों ने पूरे उत्साह और सम्मान के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया।
इन गांव को लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र माना जाता रहा है। नक्सली भय के कारण यहां राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन और खुले रूप से तिरंगा फहराना संभव नहीं हो पाता था। 31 मार्च 2026 को क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने के बाद पहली बार इन गांवों में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन हुआ और ग्रामीणों ने स्वतंत्र माहौल में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर देश के प्रति अपनी आस्था और जुड़ाव व्यक्त किया।
नारायणपुर पुलिस अधीक्षक संदीप पटेल ने कहा कि सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों से छत्तीसगढ़ अब नक्सल मुक्त स्थिति की ओर बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि इस बार का स्वतंत्रता दिवस विशेष है, क्योंकि नक्सल भय से मुक्त होने के बाद अबूझमाड़ के कई गांवों में पहली बार ग्रामीण अपने गांव में तिरंगा फहरा रहे हैं। उन्होंने सभी ग्रामीणों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए लोकतंत्र के इस पर्व को उत्साह से मनाने की अपील की।
पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाए जाने को लेकर गांवों में खुशी और गर्व का माहौल रहा। ग्रामीणों ने तिरंगे को सम्मानपूर्वक नमन किया और राष्ट्रीय पर्व में भागीदारी निभाई। अबूझमाड़ के इन गांवों में तिरंगा फहराया जाना क्षेत्र में बदलते हालात, लौटती शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।