संविधान की हत्या के 50 वर्ष: बृजमोहन अग्रवाल

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Update: 2025-06-28 16:03 GMT
Raipur. रायपुर। देश में 25 जून 1975 को थोपे गए आपातकाल को याद करते हुए रायपुर के एकात्म परिसर में "संविधान हत्या दिवस" विषय पर संगोष्ठी एवं लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे मीसा बंदी अप्पा खरे सहित कई लोकतंत्र रक्षकों को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताया। वक्ताओं ने कहा कि जिस संविधान की शपथ लेकर सत्ता प्राप्त की गई, उसी संविधान की आत्मा को कुचलते हुए मीडिया, न्यायपालिका, संसद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समाप्त कर देश को तानाशाही की ओर धकेल दिया गया था।
लोकतंत्र सेनानियों को किया गया नमन
इस मौके पर उन सभी वीर लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि व सम्मान दिया गया जिन्होंने दमन,
अत्याचार
और जेल की यातनाएं सहकर लोकतंत्र की लौ बुझने नहीं दी। कार्यक्रम में मंत्री केदार कश्यप, विधायक राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, सांसद सुनील सोनी, महापौर मीनल चौबे, और विभिन्न बोर्ड/मंडल अध्यक्ष सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर यह संदेश दिया गया कि लोकतंत्र को मजबूत और सुरक्षित रखने के लिए इतिहास से सीख लेना जरूरी है, और उन लोकतंत्र के प्रहरियों का स्मरण करना हमारी जिम्मेदारी है, जिन्होंने अपने साहस से संविधान को बचाया।
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