हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखने के लिए 36 वरिष्ठ सीनियर लॉयर्स नियुक्त

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Update: 2026-02-23 17:15 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से मुकदमों का पक्ष रखने के लिए 36 वरिष्ठ सीनियर लॉयर्स का पैनल तैयार किया है। यह नियुक्ति तीन वर्षों के लिए होगी। पुराने पैनल लॉयर्स से संबंधित फाइलें वापस लेकर नए पैनल के अधिवक्ताओं को सौंपी जाएंगी। इस पैनल लॉयर्स का काम मुख्य रूप से केंद्र सरकार के मामलों में उच्च न्यायालय में पक्ष प्रस्तुत करना होगा। विधि मंत्रालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति द्वारा अधिवक्ताओं को इस पैनल में शामिल किया गया है और ये अधिवक्ता कर संबंधी मामलों को छोड़कर सभी केंद्र सरकार से जुड़े मुकदमों में पक्ष प्रस्तुत करेंगे।

पैनल में शामिल अधिवक्ताओं के नाम
भूपेन्द्र नारायण सिंह, रमाकांत पाण्डेय, अन्नपूर्णा तिवारी, उमाकांत सिंह चंदेल, अजित कुमार सिंह, हेमंत गुप्ता, मनोज कुमार मिश्रा, सतीश गुप्ता, किशन लाल साहू, हेमंत केशरवानी, अनमोल शर्मा, रूप नायक, मनय नाथ ठाकुर, अंकुर कश्यप, मांडवी भारद्वाज, हिमांशु पाण्डेय, रघुवीर प्रताप सिंह, सागर सोनी, अजय पाण्डेय, रविकांत पटेल, प्रमोद श्रीवास्तव, चेतन कुमार, अरविन्द पटेल, त्रिवेणी शंकर साहू, भरत कुमार गुलाबानी, प्रज्ञा पाण्डेय, अभिषेक बंजारे, अमितेश पाण्डेय, अंजू श्रीवास्तव, विद्या भूषण सोनी, अमन केशरवानी, शाल्विक तिवारी, सुचित्रा बैस, सौरभ चौबे, अमन ताम्रकार और अभिमन्यु रत्नपारखी। नियुक्ति आदेश में कहा गया है कि इन अधिवक्ताओं की नियुक्ति और पेशेवर शुल्क संबंधित विभाग के नियमों और शर्तों के अनुसार, पूर्व में जारी कार्यालय ज्ञापनों के आधार पर तय किया जाएगा। विशेष रूप से 05 फरवरी 2026 के कार्यालय ज्ञापन, 08 फरवरी 2018 और 16 अक्टूबर 2024 के कार्यालय ज्ञापनों के अनुसार पैनल अधिवक्ताओं पर कुछ प्रतिबंध भी लागू होंगे।

बिलासपुर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक
आईएसबीएम यूनिवर्सिटी, रायपुर द्वारा संचालित पीजीडीआरडी (पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन रूरल डेवलपमेंट) को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इस कोर्स के जरिए प्राप्त डिग्री को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में होने वाली नियुक्तियों के लिए मान्यता देने पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। सिंगल बेंच जस्टिस पीपी साहू ने कहा कि आगामी सुनवाई तक संबंधित यूनिवर्सिटी की डिग्री वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश नहीं दिया जाएगा। इस मामले में राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नोटिस जारी किया गया है।

अगली सुनवाई 16 मार्च से होने वाले सप्ताह में होगी। याचिका में प्रियांशु दानी सहित सात अभ्यर्थियों ने दावा किया कि आईएसबीएम यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित डिप्लोमा कोर्स निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करता। जांच समिति ने 9 अक्टूबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में इस पाठ्यक्रम को अवैध घोषित किया। जानकारी के अनुसार, यह प्रोग्राम यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस नंबर 57 के तहत संचालित है, जो मूल रूप से कॉमर्स और मैनेजमेंट फैकल्टी के डिप्लोमा कोर्स से संबंधित है, रूरल डेवलपमेंट से नहीं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस पाठ्यक्रम को अमान्य माना गया और इस पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी।
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