Surguja. सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुत्ते के काटने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से एक युवक की मौत का मामला सामने आया है। दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम पंपापुर निवासी 21 वर्षीय प्रदीप चौधरी की मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि करीब तीन महीने पहले प्रदीप को गांव में एक कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में ही जड़ी-बूटी से इलाज कराते रहे। समय पर रेबीज का टीका और उचित चिकित्सा उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई।
धीरे-धीरे दिखने लगे रेबीज के लक्षण
परिजनों के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद प्रदीप का स्थानीय स्तर पर इलाज कराया जा रहा था, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। कुछ समय बाद उसमें रेबीज बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे। बताया गया कि वह कुत्तों जैसी हरकत करने लगा था और पानी तथा हवा से डरने लगा था। हालत बिगड़ने के बाद परिजनों को गंभीरता का एहसास हुआ। चार दिन पहले प्रदीप की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान हुई मौत
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सकों ने उसका इलाज शुरू किया। करीब दो दिनों तक इलाज चलने के बाद बुधवार को उसकी मौत हो गई। मौत के बाद अस्पताल में पंचनामा की कार्रवाई की गई और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
जिले में हजारों लोगों को काट चुके हैं कुत्ते
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सरगुजा जिले में बीते तीन सालों के दौरान कुत्तों के काटने की बड़ी संख्या में घटनाएं सामने आई हैं। इस अवधि में करीब 12,759 लोगों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद लापरवाही करना बेहद खतरनाक हो सकता है। रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
कुत्ते के काटने पर तुरंत लें चिकित्सा सलाह
डॉ. ममता लालवानी ने बताया कि कुत्ते के काटने या खरोंचने के बाद तुरंत सावधानी बरतना जरूरी है। उन्होंने बताया कि घाव को सबसे पहले साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीसेप्टिक लगाया जा सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि घाव पर मिर्च, हल्दी, जड़ी-बूटी या अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाने चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के घाव को सिलवाने या कसकर पट्टी बांधने से भी बचना चाहिए।
समय पर टीका ही बचाव का तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद तुरंत अस्पताल जाकर रेबीज से बचाव का टीका और जरूरत पड़ने पर इम्युनोग्लोबुलिन लेना जरूरी होता है। रेबीज से बचाव के लिए टीका लगवाने में देरी करना या केवल घरेलू उपचार पर निर्भर रहना जानलेवा साबित हो सकता है। बीमारी के लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते के काटने की घटना को गंभीरता से लें और समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
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