36 लाख के इनामी 8 नक्सली समेत 14 माओवादी गिरफ्तार, सुरक्षाबलों के बढ़ते ऑपरेशन से बैकफुट पर
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के अपने संकल्प को साकार करने में पूरी ताकत झोंक रही है। नए साल की शुरुआत से ही सुरक्षाबलों की आक्रामक कार्रवाई ने उल्लेखनीय परिणाम दिखाए हैं। जनवरी के अभी 22 दिन ही बीते हैं, और सुरक्षाबलों ने 50 से अधिक हथियारबंद माओवादियों को मुठभेड़ों में ढेर कर दिया है।
सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई का असर साफ दिख रहा है। डर के कारण नक्सली संगठन छोड़कर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। इसी क्रम में नारायणपुर जिले में 9 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन सभी पर सुरक्षाबलों के खिलाफ साजिश रचने और नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नकद सहायता, आवास और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
मुठभेड़ और आत्मसमर्पण के बीच, सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की गिरफ्तारी में भी बड़ी सफलता हासिल की है। धुर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने 14 माओवादियों को गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारियां टेकमेटला, नड़पल्ली और मल्लेमपेंटा के जंगलों से की गईं। इनमें से 8 नक्सलियों पर 36 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उनके पास से स्पाइक और जमीन खोदने वाले औजार बरामद किए गए। इस कार्रवाई में डीआरजी, उसूर थाना के जवान, कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के संयुक्त बल शामिल थे।
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन को हाल ही में गरियाबंद जिले में अंजाम दिया गया। मैनपुर के कुल्हाड़ीघाट और भालूडिग्गी क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान 27 नक्सलियों को मार गिराने का दावा किया। हालांकि, मुठभेड़ के बाद 16 नक्सलियों के शव बरामद किए गए। इस अभियान में कई शीर्ष नक्सली नेताओं का सफाया हुआ, जिसमें सीसी सदस्य चलपति और सत्यम गांवड़े भी शामिल थे।
इस सफल अभियान के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्धसैनिक बलों का मनोबल और मजबूत हुआ है। पुलिस और सुरक्षाबलों की यह संयुक्त कार्रवाई न केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल करने में सहायक होगी, बल्कि राज्य के विकास कार्यों को भी गति प्रदान करेगी। सरकार की यह रणनीति दिखाती है कि नक्सलवाद के खिलाफ इस निर्णायक लड़ाई में हर मोर्चे पर सफलता सुनिश्चित की जाएगी।