पटना। बिहार के खगड़िया जिले में पदस्थ आईपीएस अधिकारी और पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह से जुड़ा पारिवारिक विवाद अब महिला थाने तक पहुंच गया है। उनकी पत्नी पूजा सिंह ने पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पटना के महिला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पूजा सिंह ने पति पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने ससुराल पक्ष के कुछ सदस्यों पर अपनी छह वर्षीय बेटी विभा सिंह को उनसे दूर रखने और कथित रूप से अगवा करने का भी आरोप लगाया है। मामले में महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, पूजा सिंह सोमवार, 2 नवंबर की देर रात पटना महिला थाने पहुंची थीं। यहां उन्होंने अपने पति भानु प्रताप सिंह और ससुराल के अन्य सदस्यों के खिलाफ शिकायत दी। मामला एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जुड़ा होने के कारण चर्चा में आ गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस की आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी।

सचिवालय अनुमंडल की पुलिस अधिकारी अनु कुमारी ने भी पूजा सिंह की ओर से महिला थाने में शिकायत दिए जाने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि महिला थाने में शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

पूजा सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके पति लंबे समय से उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने अपने साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया है। पूजा का कहना है कि उन पर जबरन तलाक संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि वह अपने वैवाहिक संबंध को बनाए रखना चाहती हैं, लेकिन पति की ओर से उन्हें साथ रखने से इनकार किया जा रहा है।

इस मामले में सबसे गंभीर आरोप छह वर्षीय बेटी विभा सिंह को लेकर लगाया गया है। पूजा सिंह का आरोप है कि उनके ससुर उत्तम सिंह, ननदोई भीम सिंह और ननद जयमाला देवी ने उनकी बेटी को उनसे अलग कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची को घुमाने के बहाने ले जाया गया था और उसके बाद से उन्हें बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है।

पूजा सिंह के मुताबिक, वर्ष 2025 में उनकी बेटी को ससुराल पक्ष के सदस्य अपने साथ ले गए थे। इसके बाद से वह लगातार बेटी से मिलने का प्रयास कर रही हैं। उनका कहना है कि बेटी से दूर रहने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और बच्ची से मुलाकात सुनिश्चित कराने की मांग की है।

पूजा सिंह ने अपनी शिकायत में अपने वैवाहिक जीवन से जुड़ी जानकारी भी दी है। उनके अनुसार, वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा की रहने वाली हैं। उनकी शादी 16 जनवरी 2017 को भानु प्रताप सिंह से हुई थी। दोनों ने प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद भानु प्रताप सिंह भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए और उन्हें बिहार कैडर मिला।

पूजा का आरोप है कि पति के आईपीएस अधिकारी बनने और बाद में पटना में पदस्थ होने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा। उनके अनुसार, इसके बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं। वर्ष 2020 में उनकी बेटी का जन्म हुआ। हालांकि, अब पारिवारिक विवाद इतना बढ़ चुका है कि मामला पुलिस और महिला आयोग तक पहुंच गया है।

बताया जा रहा है कि पूजा सिंह इससे पहले भी अपनी शिकायत लेकर विभिन्न अधिकारियों से संपर्क कर चुकी हैं। उन्होंने बिहार के पुलिस महानिदेशक से मुलाकात करने की बात कही है। इसके अलावा उन्होंने बिहार राज्य महिला आयोग से भी न्याय की गुहार लगाई थी।

राज्य महिला आयोग ने भी पूजा सिंह की शिकायत पर संज्ञान लिया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई और भानु प्रताप सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। इससे स्पष्ट है कि मामला महिला थाने में पहुंचने से पहले भी प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर उठाया जा चुका था।

सोमवार को पूजा सिंह मुख्यमंत्री आवास भी पहुंची थीं। उन्होंने अपनी बेटी से मुलाकात कराने और पारिवारिक विवाद में हस्तक्षेप की मांग की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान भानु प्रताप सिंह और पूजा सिंह को बातचीत के लिए बुलाया गया था। हालांकि, पूजा का कहना है कि दोनों को आमने-सामने नहीं बैठाया गया।

पूजा सिंह ने दावा किया कि भानु प्रताप सिंह ने विवाद से संबंधित आगे की बातचीत अदालत में करने की बात कही है। उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर भी पति का पक्ष लेने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में मंगलवार को भी घटनाक्रम जारी रहा। पूजा सिंह खगड़िया स्थित पुलिस अधीक्षक के सरकारी आवास पहुंचीं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने वहां अपनी बेटी से मिलने और पति से बातचीत करने की कोशिश की। लेकिन आवास में प्रवेश नहीं मिलने के कारण वह कुछ समय तक बाहर बैठी रहीं। बाद में स्थानीय प्रशासन की ओर से उन्हें समझाने का प्रयास किया गया और सर्किट हाउस भेजे जाने की जानकारी सामने आई।

पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर महिलाओं की शिकायतों, पारिवारिक विवादों और बच्चों से मुलाकात के अधिकार जैसे विषयों को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, किसी भी पारिवारिक विवाद में दोनों पक्षों की बात सुनना और तथ्यों की निष्पक्ष जांच करना जरूरी होता है।

कानूनी दृष्टि से भी यह मामला संवेदनशील है। एक ओर पूजा सिंह ने प्रताड़ना और बेटी को कथित रूप से अगवा किए जाने के आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर बच्ची से संबंधित अभिरक्षा और मुलाकात के प्रश्न भी सामने आए हैं। इन मुद्दों पर निर्णय संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम न्यायालय के आदेशों के अनुसार ही हो सकता है।

महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब पुलिस की आगे की जांच पर नजर रहेगी। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित पक्षों के बयानों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा सकता है।

फिलहाल भानु प्रताप सिंह और उनके परिजनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। उनका पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। इस मामले में अब तक उपलब्ध रिपोर्टों में शिकायत और पूजा सिंह के आरोपों का विवरण प्रमुखता से सामने आया है।

आईपीएस अधिकारी से जुड़ा होने के कारण मामला सुर्खियों में है, लेकिन इसका सबसे संवेदनशील पहलू छह वर्षीय बच्ची को लेकर चल रहा विवाद है। पूजा सिंह अपनी बेटी से मिलने की मांग कर रही हैं। अब देखना होगा कि महिला थाने में दर्ज प्राथमिकी और महिला आयोग की कार्रवाई के बाद इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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