मुंगेर। मानसून के सीजन में इस बार मुंगेर जिले को पर्याप्त बारिश का इंतजार ही रह गया है। जिले में अब तक हुई बारिश के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जिला सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जून से 17 अगस्त तक मुंगेर में सामान्य से करीब 47 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा के कारण खेती-किसानी पर इसका असर पड़ने लगा है और किसानों की चिंता बढ़ गई है।

जिला सांख्यिकी कार्यालय की 17 अगस्त तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानसून अवधि में जिले में अब तक सिर्फ 353 मिलीमीटर बारिश हुई है। जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा का आंकड़ा 669.3 मिलीमीटर होना चाहिए था। यानी जिले में सामान्य से 316.3 मिलीमीटर कम बारिश हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, इस बार मुंगेर में अब तक हुई बारिश सामान्य वर्षा की तुलना में 47.3 प्रतिशत कम है। मानसून के शुरुआती महीनों में अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को अब मौसम की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है।

मुंगेर में वर्ष 2026 का मानसून पिछले चार वर्षों की तुलना में भी कमजोर साबित हो रहा है। वर्ष 2023 में इसी अवधि के दौरान जिले में 446.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। वहीं वर्ष 2024 में 430.6 मिलीमीटर और वर्ष 2025 में 501 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इन आंकड़ों से साफ है कि इस साल बारिश का स्तर पिछले वर्षों से भी नीचे चला गया है।

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है। जिले के अधिकांश किसान खेती के लिए मानसून पर निर्भर रहते हैं। धान समेत खरीफ फसलों की बुआई और विकास के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। लेकिन बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है।

किसानों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं होने से फसलों की वृद्धि प्रभावित हो रही है। कई क्षेत्रों में किसानों को निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बन रहा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की कमी का असर केवल वर्तमान फसल पर ही नहीं बल्कि आने वाले कृषि चक्र पर भी पड़ सकता है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो उत्पादन में गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।

हालांकि, मौसम विभाग की ओर से अभी भी मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। लेकिन अब तक की स्थिति ने कृषि क्षेत्र में चिंता जरूर पैदा कर दी है।

जिले में बारिश की कमी का असर जलस्रोतों पर भी पड़ सकता है। कम वर्षा के कारण तालाब, आहर, पईन और अन्य जल स्रोतों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया है। इसका प्रभाव सिंचाई और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता पर पड़ सकता है।

प्रशासन भी जिले में बारिश की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार, किसानों की स्थिति और फसलों की स्थिति का लगातार आकलन किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर किसानों को आवश्यक सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन लंबे समय तक बारिश की कमी चिंता का विषय बन सकती है। इस बार बिहार के कई जिलों में मानसून की सक्रियता असमान रही है, जिसके कारण कुछ इलाकों में कम बारिश दर्ज की गई है।

मुंगेर के किसानों की निगाहें अब आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी हैं। यदि जल्द ही अच्छी बारिश होती है तो फसलों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश की कमी जारी रहने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

फिलहाल जिले में मानसून की स्थिति कमजोर बनी हुई है। जून से 17 अगस्त तक के आंकड़े बता रहे हैं कि इस साल बारिश ने मुंगेर को निराश किया है। अब किसानों और प्रशासन दोनों को मौसम के अगले बदलाव का इंतजार है।

Tags: