समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र की दुबहा पंचायत स्थित अदलपुर गांव में वाया नदी में डूबी 14 वर्षीय किशोरी सुप्रिया कुमारी का शव करीब 50 घंटे बाद मंगलवार की सुबह बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि किशोरी का शव नदी में मछली पकड़ने के लिए लगाई गई बाड़ी में फंसा हुआ मिला। शव मिलने की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। अपनी बेटी का शव देखकर परिजन बिलख पड़े। परिवार के सदस्यों के करुण क्रंदन से पूरा माहौल गमगीन हो गया। रविवार को अपने छोटे भाई को डूबने से बचाने के दौरान सुप्रिया खुद नदी के गहरे पानी में समा गई थी। तभी से परिवार और स्थानीय ग्रामीण उसकी तलाश में जुटे हुए थे। दो दिनों तक उम्मीद लगाए बैठे परिवार को मंगलवार सुबह सुप्रिया की मौत की खबर मिली तो गांव में मातम पसर गया।
छोटे भाई की जान बचाते समय नदी में डूबी थी सुप्रिया
जानकारी के अनुसार, अदलपुर गांव निवासी चंदन चौधरी और शिक्षिका जूही कुमारी की 14 वर्षीय बेटी सुप्रिया कुमारी उर्फ किट्टू रविवार, 25 अक्टूबर की सुबह अपने छोटे भाई केशव और दादी के साथ वाया नदी के काली घाट पर स्नान करने गई थी।इसी दौरान उसका भाई केशव नदी में उतरकर गहरे पानी की ओर चला गया। भाई को डूबता देख सुप्रिया ने बिना देर किए उसे बचाने की कोशिश की।उसने भाई का हाथ पकड़कर उसे किनारे की ओर खींचा। इस दौरान केशव को बचा लिया गया, लेकिन सुप्रिया खुद गहरे पानी में चली गई।घाट के पास मौजूद लोगों ने बच्चों की चीख-पुकार सुनी तो तत्काल मदद के लिए दौड़े। ग्रामीणों ने नदी में उतरकर बचाव का प्रयास किया, लेकिन सुप्रिया का पता नहीं चल सका।
इस घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई थी।
50 घंटे तक चलती रही किशोरी की तलाशसुप्रिया के नदी में डूबने की खबर मिलते ही स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए।परिजनों के साथ गांव के लोगों ने नदी में किशोरी की तलाश शुरू की। स्थानीय गोताखोरों को भी बुलाया गया।गोताखोर गोरख सहनी सहित अन्य लोगों ने नदी में उतरकर कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन रविवार को सुप्रिया का कोई सुराग नहीं मिल सका।इसके बाद सोमवार को भी तलाश जारी रही। परिजन लगातार नदी किनारे मौजूद रहे और किसी अच्छी खबर का इंतजार करते रहे।करीब 50 घंटे बाद मंगलवार सुबह किशोरी का शव नदी में मिलने की जानकारी सामने आई।
मछली पकड़ने वाली बाड़ी में फंसा मिला शव
मंगलवार की सुबह वाया नदी में मछली पकड़ने के लिए लगाई गई बाड़ी में एक शव फंसा दिखाई दिया।जानकारी मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। शव की पहचान लापता सुप्रिया कुमारी के रूप में की गई।करीब दो दिनों से जारी तलाश के बाद किशोरी का शव मिलने से ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई।नदी किनारे देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई।शव को नदी से निकालने के दौरान स्थानीय लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
बेटी का शव देखकर बिलख पड़े माता-पिता
सुप्रिया का शव बरामद होने की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य घटनास्थल पर पहुंचे।जिस बेटी के सुरक्षित लौटने की उम्मीद परिवार दो दिनों से लगाए बैठा था, उसकी मौत की खबर ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया।परिजनों की चीख-पुकार से नदी किनारे मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।सुप्रिया के पिता चंदन चौधरी और मां जूही कुमारी के लिए यह घटना बेहद दुखद है।ग्रामीणों के अनुसार, सुप्रिया अपने परिवार की होनहार बच्ची थी। वह पढ़ाई के साथ परिवार के सदस्यों से भी काफी लगाव रखती थी।
आठवीं कक्षा की छात्रा थी सुप्रिया
सुप्रिया कुमारी उर्फ किट्टू वेल्लालूर स्थित एक निजी विद्यालय में आठवीं कक्षा की छात्रा थी।14 वर्षीय सुप्रिया पढ़ाई कर रही थी और परिवार को उसके भविष्य से कई उम्मीदें थीं।रविवार को छुट्टी होने के कारण वह अपने भाई और दादी के साथ नदी पर गई थी।लेकिन कुछ ही देर में हुई दुर्घटना ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि सुप्रिया ने अपने छोटे भाई की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन स्वयं सुरक्षित बाहर नहीं निकल सकी।भाई की जान बचाने के उसके साहस को याद कर ग्रामीण भी भावुक हैं।
एसडीआरएफ की मदद के लिए अधिकारियों से की गई थी मांग
सुप्रिया के डूबने के बाद स्थानीय स्तर पर खोजबीन शुरू की गई थी।घटना की गंभीरता को देखते हुए विधायक प्रतिनिधि रवीश कुमार सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया था।उन्होंने अंचलाधिकारी विवेक कुमार सिंह और अनुमंडल पदाधिकारी विकास पांडेय से किशोरी की तलाश के लिए राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ की टीम भेजने का आग्रह किया था।इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीण और गोताखोर लगातार खोजबीन में सहयोग कर रहे थे।तलाशी अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोग घाट पर मौजूद रहे।
घटना से पूरे अदलपुर गांव में मातम
सुप्रिया की मौत ने अदलपुर गांव के लोगों को गहरे दुख में डाल दिया है।रविवार को जिस स्थान पर लोग बच्चों के स्नान के दौरान हुई दुर्घटना की खबर सुनकर जमा हुए थे, मंगलवार को वहीं किशोरी का शव मिलने से माहौल गमगीन हो गया।ग्रामीणों का कहना है कि नदी में स्नान करते समय बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।वाया नदी के कई स्थानों पर पानी की गहराई और बहाव का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।ऐसे में बच्चों को बिना पर्याप्त निगरानी के नदी में उतरने से रोकना बेहद जरूरी है।
नदी घाटों पर सुरक्षा इंतजामों की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग स्नान, पूजा और अन्य दैनिक कार्यों के लिए नदियों का उपयोग करते हैं।कई स्थानों पर घाटों के आसपास गहरे पानी की चेतावनी देने वाले बोर्ड, सुरक्षित सीढ़ियां या तत्काल बचाव के उपकरण उपलब्ध नहीं होते।
ऐसी परिस्थितियों में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर पर संवेदनशील घाटों की पहचान कर सुरक्षा संबंधी इंतजाम किए जाने की आवश्यकता है।इसके अलावा बच्चों को पानी में सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है।
डूबते व्यक्ति को बचाते समय खुद की सुरक्षा भी जरूरी
जल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति को डूबते देखकर बिना सुरक्षा उपकरण के गहरे पानी में कूदना अत्यंत जोखिम भरा हो सकता है।ऐसी स्थिति में तत्काल आसपास मौजूद लोगों को मदद के लिए बुलाना चाहिए।जहां संभव हो, सुरक्षित स्थान से रस्सी, लाइफ रिंग या तैरने वाली वस्तु की सहायता से बचाव करना चाहिए।प्रशिक्षित बचावकर्मियों को बुलाना भी जरूरी है, ताकि एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में दूसरा व्यक्ति दुर्घटना का शिकार न हो।
सुप्रिया की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
वाया नदी में डूबने के करीब 50 घंटे बाद सुप्रिया का शव मिलने से परिवार की उसे सुरक्षित वापस पाने की उम्मीद समाप्त हो गई।जिस छोटे भाई को बचाने के लिए उसने प्रयास किया, उसकी जान तो बच गई, लेकिन सुप्रिया खुद इस दुनिया से चली गई।
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