gayaगया : 'एक राष्ट्र एक चुनाव' पहल पर चल रही बहस के बीच, जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने गुरुवार को कहा कि अगर 'एक राष्ट्र एक चुनाव' सही नीयत से किया जाए तो इसमें कोई समस्या नहीं है। हालांकि, उन्होंने पहल के संचालन और समय को लेकर भाजपा की 'नीयत' पर भी निशाना साधा और कहा कि भाजपा नेता लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के दौरान इस बारे में बात नहीं कर रहे थे, लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद वे इस पर चर्चा कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने कहा, "हमने पहले भी कहा है कि अगर एक राष्ट्र एक चुनाव सही नीयत से किया जाता है, तो इसमें कोई गलती नहीं है। आजादी के बाद 1965 तक एक राष्ट्र एक चुनाव लागू था, लेकिन अगर यह इस इरादे से किया जा रहा है कि जब स्थिति हमारे पक्ष में होगी तो जल्दी से सभी चुनाव एक साथ कराएंगे।" झारखंड में दो चरणों में होने वाले मतदान का जिक्र करते हुए किशोर ने कहा, "एक तरफ आप एक राष्ट्र एक चुनाव की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ झारखंड जैसे छोटे से राज्य को चार हिस्सों में बांटकर चुनाव करवा रहे हैं ताकि प्रचार के लिए समय मिल सके। ये दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं। इससे पता चलता है कि अगर देश में बीजेपी की लहर है तो वे सभी चुनाव एक ही जगह करवाना चाहते हैं।" किशोर ने दोहराया कि इस अवधारणा में "कोई गलती" नहीं है, लेकिन इसके पीछे की मंशा की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "इस अवधारणा में कोई दोष नहीं है, लेकिन यह गलत इरादों के साथ किया जा रहा है। एक राष्ट्र एक चुनाव होना चाहिए, क्योंकि इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन इरादे सही होने चाहिए। जब ​​कोई कानून बनता है, तो उसके पीछे की मंशा की जांच होनी चाहिए। यह जांच होनी चाहिए कि यह किसी एक समुदाय को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है या किसी को डराने के लिए या राजनीतिक लाभ उठाने के लिए बनाया गया है। भाजपा नेता लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक राष्ट्र, एक चुनाव के बारे में बात नहीं कर रहे थे, क्योंकि उन्हें कम सीटें मिलीं, लेकिन, अब वे हरियाणा में जीते हैं, उन्होंने फिर से एक राष्ट्र, एक चुनाव की बात शुरू कर दी है। यदि आप (भा
जपा) देश के
पक्ष में हैं, तो दोनों स्थितियों में आचरण करें, चाहे आप जीत रहे हों या नहीं, लेकिन इसे अपनी जीत या हार के साथ जोड़कर देश पर न थोपें।" इससे पहले आज प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' और धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रही है।
गुजरात के केवड़िया में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम अब एक राष्ट्र एक चुनाव की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा, भारत के संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा और देश विकसित भारत के सपने को साकार करने में नई गति प्राप्त करेगा। आज भारत एक राष्ट्र एक नागरिक संहिता यानी धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की ओर बढ़ रहा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारत में अलग-अलग कर व्यवस्थाएं थीं, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक राष्ट्र एक कर प्रणाली- जीएसटी बनाया। उन्होंने कहा, "आज हम सभी एक राष्ट्र पहचान- आधार की सफलता देख रहे हैं और दुनिया भी इसकी चर्चा कर रही है। पहले भारत में अलग-अलग कर व्यवस्थाएं थीं, लेकिन हमने एक राष्ट्र एक कर प्रणाली- जीएसटी बनाया।"
उन्होंने कहा, "हमने वन नेशन वन पावर ग्रिड के साथ देश के बिजली क्षेत्र को मजबूत किया। हमने वन नेशन वन राशन कार्ड के माध्यम से गरीबों को मिलने वाली सुविधाओं को एकीकृत किया। हमने आयुष्मान भारत के रूप में देश के लोगों को वन नेशन वन हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा प्रदान की है।"गौरतलब है कि 18 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकार के 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसमें लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव है, साथ ही 100 दिनों के भीतर शहरी निकाय और पंचायत चुनाव कराने का भी प्रस्ताव है।पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट में ये सिफारिशें की गई थीं। (एएनआई)
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