Bihar: सासाराम के डायट, फजलगंज में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के तहत केंद्रीय बिहार क्षेत्र की दो दिवसीय दिशा-निर्देशन सह प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया. इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर विज्ञान शिक्षा को अधिक व्यवहारिक, शोधपरक और नवाचार आधारित बनाना है, ताकि छात्र-छात्राएं वैज्ञानिक सोच के साथ समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकें. कार्यशाला का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) निशांत गुंजन, साइंस फॉर सोसायटी बिहार के राज्य समन्वयक डॉ. संदीप कुमार, प्रो. जे.के. सिंह, डॉ. रवि प्रभाकर और विजेंद्र केसरी सहित कई गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, मेंटर और शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे.
इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में रोहतास सहित मध्य बिहार के 11 जिलों से आए करीब 40 विज्ञान शिक्षक, मेंटर और समन्वयक भाग ले रहे हैं. प्रशिक्षण में शिक्षकों को छात्रों के लिए वैज्ञानिक परियोजनाओं के चयन, अनुसंधान पद्धति, प्रयोग, अवलोकन, विश्लेषण, प्रलेखन और प्रस्तुतीकरण की विस्तृत जानकारी दी जा रही है. कार्यक्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय ने कहा कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है. इससे बच्चों में शोध की प्रवृत्ति और समस्याओं के समाधान की क्षमता बढ़ती है. उन्होंने शिक्षकों से अधिक से अधिक विद्यार्थियों को विज्ञान आधारित परियोजनाओं से जोड़ने की अपील की.
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी निशांत गुंजन ने कहा कि इस पहल से विज्ञान शिक्षा को व्यवहारिक रूप देने में मदद मिलेगी और इसका प्रभाव सीधे स्कूलों तक पहुंचेगा. प्रशिक्षक विजेंद्र केसरी ने बताया कि इस वर्ष का मुख्य विषय “सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार” रखा गया है. इसके अंतर्गत छात्र पांच प्रमुख उपविषयों पर परियोजनाएं तैयार करेंगे, जिनमें अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भोजन एवं कृषि-स्वास्थ्य और भारतीय ज्ञान प्रणाली का सतत विकास में उपयोग शामिल हैं.
प्रशिक्षकों ने जानकारी दी कि 15 जुलाई तक जिला स्तर पर शिक्षक कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी. इसके बाद छात्रों का पंजीकरण, परियोजना निर्माण और जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी. चयनित परियोजनाएं राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में भाग लेंगी. पूर्व जिला समन्वयक सुदामा पांडेय ने शिक्षकों से बच्चों में जिज्ञासा और अनुसंधान की भावना विकसित करने पर जोर दिया. कार्यक्रम में कई शिक्षा अधिकारी और साइंस फॉर सोसायटी से जुड़े सदस्य भी उपस्थित रहे. यह कार्यशाला क्षेत्र में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा देने की पहल मानी जा रही है.