बिहार में छोटे उद्योगों से बढ़ेगा रोजगार, अगले बजट में मिल सकता है विशेष फंड
पटना। बिहार में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और लोगों की आय बढ़ाने के लिए सरकार अब छोटे उद्योगों के विस्तार पर विशेष ध्यान दे सकती है। ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सम्राट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में छोटे उद्योगों को रोजगार और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाने की सिफारिश की गई है। इसके लिए अगले वित्तीय वर्ष के बजट में विशेष फंड का प्रावधान किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
यह तीन सदस्यीय कमेटी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में गठित की गई थी। कमेटी को राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने, लोगों की आय में वृद्धि करने और आर्थिक विकास की रफ्तार को तेज करने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई थी। विस्तृत अध्ययन के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
रिपोर्ट में छोटे और स्थानीय उद्योगों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। कमेटी का मानना है कि बड़े उद्योगों के साथ छोटे उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य के अलग-अलग जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। छोटे उद्योगों में अपेक्षाकृत कम निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने की क्षमता होती है।
सरकार यदि कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार करती है तो अगले बजट में छोटे उद्योगों के लिए अलग से वित्तीय प्रावधान देखने को मिल सकता है। इस फंड का इस्तेमाल नए उद्यमों को बढ़ावा देने, मौजूदा छोटी औद्योगिक इकाइयों के विस्तार और आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि फंड की राशि और उसके इस्तेमाल की विस्तृत रूपरेखा बजट तथा सरकारी फैसलों के बाद ही स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट में केवल रोजगार बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक विकास दर को लगातार ऊंचे स्तर पर बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। कमेटी ने अगले पांच वर्षों तक बिहार की सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP की वृद्धि दर कम से कम 16 प्रतिशत पर बरकरार रखने का लक्ष्य सुझाया है। इसके लिए निवेश, उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र में तेजी से विस्तार की जरूरत होगी।
बिहार लंबे समय से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता की चुनौती का सामना करता रहा है। बड़ी संख्या में लोग रोजगार और बेहतर आय की तलाश में दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों का रुख करते हैं। छोटे उद्योगों का विस्तार होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के विकल्प बढ़ सकते हैं और काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों को अपने जिले या आसपास के क्षेत्रों में अवसर मिल सकते हैं।
कमेटी की रिपोर्ट में क्षेत्रीय असमानता को कम करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। बिहार के सभी क्षेत्रों में औद्योगिक और आर्थिक विकास की स्थिति समान नहीं है। कुछ जिलों में कारोबारी गतिविधियां और बुनियादी सुविधाएं अपेक्षाकृत बेहतर हैं, जबकि कई क्षेत्रों में उद्योगों और रोजगार के अवसर सीमित हैं। रिपोर्ट में संतुलित विकास की रणनीति अपनाने की सिफारिश की गई है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि औद्योगिक विकास केवल कुछ बड़े शहरों या चुनिंदा जिलों तक सीमित न रहे। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापित हों। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल, कृषि उत्पाद और पारंपरिक कौशल के आधार पर छोटे उद्योग विकसित किए जाएं तो रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
बिहार में कृषि और उससे जुड़े उत्पादों के आधार पर भी छोटे उद्योगों के विस्तार की बड़ी संभावना है। खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मखाना, मक्का, फल-सब्जी प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उत्पादों से जुड़े उद्यमों के विस्तार से किसानों और छोटे कारोबारियों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, परिवहन और विपणन तक रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं।
छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केवल वित्तीय सहायता ही पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए बिजली, सड़क, परिवहन, जमीन, बाजार और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाओं की भी जरूरत होगी। नए उद्यमियों को प्रशिक्षण और कारोबार शुरू करने से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना भी महत्वपूर्ण होगा। यदि इन क्षेत्रों में सुधार किया जाता है तो छोटे उद्योगों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
रिपोर्ट में रोजगार और आय दोनों को एक साथ बढ़ाने पर जोर दिया गया है। केवल रोजगार की संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसे आर्थिक अवसर विकसित करने की जरूरत बताई गई है, जिनसे लोगों की आमदनी में भी वास्तविक वृद्धि हो। यही कारण है कि कमेटी ने ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य के साथ आर्थिक विकास की तेज रफ्तार बनाए रखने की सिफारिश की है।
अब सरकार के सामने कमेटी की सिफारिशों को नीतिगत रूप देने की चुनौती होगी। अगले बजट में यदि छोटे उद्योगों के लिए विशेष फंड बनाया जाता है तो यह सरकार की रोजगार रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है। इसके बाद यह देखना होगा कि फंड का वितरण किस आधार पर होगा और किन क्षेत्रों तथा उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
GSDP की वृद्धि दर को अगले पांच वर्षों तक कम से कम 16 प्रतिशत पर बनाए रखने का सुझाव भी महत्वाकांक्षी है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी निवेश आकर्षित करने, नए उद्योग स्थापित करने, मौजूदा कारोबार का विस्तार करने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता होगी।
तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद अब निगाहें अगले बजट और सरकार की आगामी औद्योगिक नीतियों पर टिकी हैं। यदि रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों को लागू किया जाता है तो छोटे उद्योग बिहार की रोजगार नीति के केंद्र में आ सकते हैं। सरकार के सामने लक्ष्य साफ है—स्थानीय स्तर पर अधिक रोजगार, लोगों की आय में बढ़ोतरी और राज्य के सभी क्षेत्रों में संतुलित आर्थिक विकास।