मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में पटाखा कारोबार की जांच के दौरान वाणिज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गरीबस्थान रोड स्थित पटाखा मंडी की तीन दुकानों में दो दिनों तक चली जांच के बाद 10 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का पटाखा स्टॉक जब्त किया गया। अधिकारियों को दुकानों में मौजूद माल और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच अंतर मिला। संबंधित कारोबारी इसका हिसाब स्पष्ट करने वाले कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद विभाग ने जब्ती की कार्रवाई की।
तिरहुत प्रमंडल के अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने राज्य कर अपर आयुक्त शशि भानु के निर्देश पर यह अभियान चलाया। गुरुवार शाम शुरू हुआ निरीक्षण शुक्रवार देर शाम तक चला। अधिकारियों ने गायत्री ट्रेडर्स, मॉडर्न ट्रेडर्स और हिंद स्टोर में रखे पटाखों का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान दुकानों में उपलब्ध स्टॉक का संबंधित कागजात से मिलान किया गया। जांच में सामने आए अंतर के संबंध में दस्तावेज नहीं मिलने पर तीनों प्रतिष्ठानों के माल को जब्त किया गया।
जब्त पटाखों को फिलहाल संबंधित कारोबारियों की जिम्मेदारी पर रखा गया है। विभाग अब स्टॉक की खरीद और कर भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है। इन कागजात के परीक्षण से स्पष्ट होगा कि माल की खरीद और कारोबार पर नियमानुसार कर चुकाया गया था या नहीं। अभी सामने आया 10 करोड़ रुपये से अधिक का आंकड़ा जब्त पटाखों के मूल्य का है। इसे कर चोरी की अंतिम राशि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
अपर आयुक्त शशि भानु के अनुसार, तीन दुकानों के सर्वे के दौरान अधिकारियों ने आय-व्यय और खरीद-बिक्री के कागजात मांगे थे। कारोबारी ये दस्तावेज नहीं दिखा सके। सर्वे पूरा होने के बाद माल सीज किया गया। अब संबंधित प्रतिष्ठानों को विभागीय नोटिस जारी किए जाएंगे। दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में टैक्स के साथ पेनाल्टी वसूलने की कार्रवाई भी होगी। इस तरह मामले का अगला चरण कारोबारियों के जवाब और उनके द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले रिकॉर्ड पर केंद्रित रहेगा। Hindustan
विभाग की निगरानी पटाखा कारोबार तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों ने त्योहारों के दौरान दूसरे कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों का भी सर्वे कराने की बात कही है। इसके लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। दाखिल रिटर्न की जांच के आधार पर ऐसे प्रतिष्ठानों की पहचान की जा रही है, जहां गड़बड़ी की आशंका है। सर्वे में बिना कागजात का सामान मिलने पर उसे सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। इससे आने वाले दिनों में अन्य दुकानों तक भी जांच का दायरा पहुंच सकता है।
बिहार के दूसरे जिलों में भी पटाखा कारोबार की जांच चल रही है। समस्तीपुर में गुरुवार को वाणिज्य कर विभाग की टीम ने चीनी मिल चौक स्थित थोक पटाखा विक्रेता और उसके गोदाम का निरीक्षण किया। राज्य कर उपायुक्त अफजल हसनैन के नेतृत्व में अधिकारियों ने स्टॉक का मिलान किया। जांच में बिना हिसाब-किताब के पटाखे रखने, समय पर जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने और कर भुगतान में अनियमितता की बात सामने आई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने पर ही वास्तविक कर चोरी का आकलन होगा। jagran.com
समस्तीपुर में आगामी त्योहारों को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है। विभाग ने रोसड़ा, दलसिंहसराय और पटोरी अनुमंडलों के पटाखा विक्रेताओं के यहां भी विशेष जांच अभियान चलाने की तैयारी बताई है। बकाएदार करदाताओं से समय पर कर भुगतान करने की अपील की गई है। वहां की कार्रवाई में भी स्टॉक, रिटर्न और भुगतान के रिकॉर्ड का मिलान प्रमुख आधार है। मुजफ्फरपुर का मामला इसी दौरान सामने आया है, हालांकि दोनों जिलों की जांच और संबंधित प्रतिष्ठान अलग हैं।
गया और औरंगाबाद में भी तीन थोक प्रतिष्ठानों से सात करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के पटाखे जब्त किए गए हैं। गया के शारदा लाइट हाउस से 1.72 करोड़ रुपये का माल जब्त हुआ, जबकि नाजो पटाखा में एक करोड़ रुपये से अधिक के स्टॉक का अनुमान बताया गया। औरंगाबाद के गोस्वामी फायरवर्क्स से लगभग 4.62 करोड़ रुपये के पटाखे जब्त किए गए। वहां भी कारोबारियों को नोटिस देकर कागजात मांगने और जांच के बाद टैक्स तथा जुर्माने की राशि तय करने की बात कही गई है।
इधर, मोतिहारी में जीएसटी विभाग और मुजफ्फरपुर के अन्वेषण ब्यूरो की संयुक्त टीम ने गुदरी बाजार के एक पटाखा कारोबारी तथा अवधेश चौक के एक ट्रांसपोर्टर के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। पटाखा कारोबारी के यहां से करीब 60 लाख रुपये का माल जब्त हुआ। वहां भी उपलब्ध सामान और दस्तावेजों के विवरण में अंतर मिला। यह मुजफ्फरपुर की 10 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती से अलग कार्रवाई है।
मुजफ्फरपुर में अब आगे की कार्रवाई दस्तावेजों के परीक्षण से तय होगी। कारोबारियों को खरीद-बिक्री और कर भुगतान का हिसाब प्रस्तुत करना होगा। जब्त माल का बड़ा मूल्य इस जांच को महत्वपूर्ण बनाता है, लेकिन अंतिम कर देनदारी और पेनाल्टी का निर्धारण विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल तीन प्रतिष्ठानों का स्टॉक जब्त है और उनके कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड जांच के केंद्र में हैं।