पटना। प्रवर्तन निदेशालय ने 7.96 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रीति सिंह के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। प्रीति सिंह भारतीय स्टेट बैंक की गया स्थित मानपुर शाखा की पूर्व फील्ड ऑफिसर हैं। ईडी के पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने विशेष पीएमएलए अदालत में मामला प्रस्तुत किया है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर और गलत तरीके से ओवरड्राफ्ट सुविधाएं हासिल कर धन प्राप्त किया गया। इसके बाद इस रकम का इस्तेमाल व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों के लिए किया गया।
इस मामले में प्रीति सिंह का पदनाम स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। वह सीबीआई की पूर्व अधिकारी नहीं, बल्कि एसबीआई की पूर्व बैंक अधिकारी हैं। सीबीआई का संबंध मामले की प्राथमिकी और शुरुआती आपराधिक जांच से है। उसी मामले के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की और अब अदालत में अभियोजन शिकायत प्रस्तुत की है। इस तरह बैंक में उनकी पूर्व नियुक्ति और मामले की जांच करने वाली एजेंसियों की भूमिका अलग-अलग है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई एसबीआई की मानपुर शाखा से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर हुई है। 
ईडी ने 30 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत शिकायत दाखिल की। एजेंसी की जांच सीबीआई की प्राथमिकी और 30 दिसंबर 2022 को दाखिल आरोपपत्र संख्या 15/2022 पर आधारित थी। ईडी ने प्रीति सिंह पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए अभियोजन और दोषसिद्धि की मांग की है। हालांकि, शिकायत दाखिल होना अदालत का अंतिम फैसला नहीं है। आरोपों और संबंधित साक्ष्यों पर न्यायिक प्रक्रिया के दौरान विचार होगा। इस समय सामने आई कार्रवाई को अभियोजन शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए। 
एजेंसी के मुताबिक, प्रीति सिंह ने बैंक में कार्यरत रहते हुए सावधि जमा के बदले 68 ओवरड्राफ्ट खातों को कथित रूप से गलत तरीके से स्वीकृत और संचालित किया। ये खाते उनके तथा रिश्तेदारों के नाम पर खोले जाने का आरोप है। ईडी का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड में बदलाव किया गया और सावधि जमा पर लगी रोक हटाकर उन्हीं प्रतिभूतियों के आधार पर एक से अधिक ओवरड्राफ्ट सुविधाएं ली गईं। जांच में कथित अपराध से प्राप्त रकम 7,96,00,916 रुपये बताई गई है।
ईडी की ओर से बताए गए घटनाक्रम में बैंक रिकॉर्ड और जमा राशि के आधार पर उपलब्ध कराई गई सुविधाएं प्रमुख हैं। आरोप का केंद्र यह है कि जिन वित्तीय संसाधनों को ओवरड्राफ्ट के लिए आधार बनाया गया, उनका बार-बार इस्तेमाल किया गया। इस विवरण में खाते खोलने, सुविधाएं स्वीकृत करने और संबंधित बैंक रिकॉर्ड की भूमिका सामने आती है। हालांकि, किस खाते में कौन-सा बदलाव हुआ और प्रत्येक लेनदेन में किसकी भूमिका थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि रकम का एक हिस्सा अतिरिक्त सावधि जमा बनाने में लगाया गया। इन जमाओं का इस्तेमाल आगे और ओवरड्राफ्ट या ऋण सुविधाएं प्राप्त करने के लिए किए जाने की बात कही गई है। बैंक ने बाद में गिरवी रखी सावधि जमाओं से कुछ राशि वसूल की। शेष रकम प्रीति सिंह ने परिवार और रिश्तेदारों की वित्तीय सहायता से चुकाई। ईडी का पक्ष है कि बाद में राशि लौटाने से उससे पहले कथित अपराध से प्राप्त धन को हासिल करने, रखने और इस्तेमाल करने संबंधी उसके निष्कर्ष नहीं बदलते।
राशि की वापसी और आरोपों की स्थिति को अलग-अलग समझना आवश्यक है। उपलब्ध विवरण में रकम चुकाए जाने की जानकारी है, लेकिन इसे मामले में किसी न्यायिक राहत या आरोप समाप्त होने की घोषणा नहीं बताया गया है। इसी तरह 7.96 करोड़ रुपये को बैंक की वर्तमान बकाया राशि के रूप में प्रस्तुत करना भी सही नहीं होगा। खबर में यह आंकड़ा एजेंसी द्वारा बताई गई कथित अपराध से प्राप्त रकम से जुड़ा है। वसूली, भुगतान और आरोपों के संबंध में अंतिम स्थिति अदालत की कार्यवाही से स्पष्ट होगी।
ईडी की आधिकारिक जानकारी भी इस मामले को कथित धोखाधड़ी वाले ओवरड्राफ्ट और बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर से जोड़ती है। एजेंसी ने व्यक्तिगत तथा पारिवारिक इस्तेमाल के बाद राशि चुकाए जाने का उल्लेख किया है। इससे कार्रवाई का विषय स्पष्ट होता है, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाते। मामले में बैंक अधिकारी की कथित भूमिका, धन प्राप्त करने का तरीका और उसके इस्तेमाल का विवरण जांच एजेंसी के पक्ष के रूप में सामने आया है। 
फिलहाल प्रमुख घटनाक्रम प्रीति सिंह के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल होना है। उपलब्ध रिपोर्ट में उनकी ओर से प्रतिक्रिया या बचाव पक्ष का विस्तृत जवाब शामिल नहीं है। गिरफ्तारी अथवा किसी नई संपत्ति कुर्की की जानकारी भी इस कार्रवाई के विवरण में नहीं दी गई है। इसलिए खबर का आधार अदालत में दाखिल शिकायत और ईडी द्वारा बताए गए आरोप हैं। मामले में दोषसिद्धि का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है और आरोपों पर सक्षम अदालत में विचार होना बाकी है।
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