तीन जोन में बांटा गया शहर
ऑटो और ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने के लिए पटना को ग्रीन, येलो और ब्लू जोन में बांटने की व्यवस्था तैयार की गई है। प्रत्येक जोन में अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए हैं। परमिट मिलने के बाद वाहन को निर्धारित क्षेत्र और रूट के अनुसार ही चलना होगा। नई व्यवस्था का बड़ा उद्देश्य शहर के उन हिस्सों में ऑटो और ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करना है जहां वर्तमान में ट्रैफिक का अत्यधिक दबाव रहता है। रेलवे स्टेशन, बाजार, अस्पताल और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों की ओर जाने वाले रास्तों पर बड़ी संख्या में तीन पहिया वाहनों के कारण अक्सर जाम की समस्या सामने आती है।
रूट के आधार पर मिलेगा परमिट
नई व्यवस्था में केवल वाहन का परमिट होना ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि उसके संचालन का रूट भी महत्वपूर्ण होगा। आवेदन के दौरान वाहन मालिक को निर्धारित जोन और उपलब्ध रूट के अनुसार विकल्प देना होगा। प्रशासन प्रत्येक रूट की यात्री क्षमता और यातायात दबाव को देखते हुए वाहनों की संख्या नियंत्रित कर सकता है। इससे किसी एक व्यस्त रूट पर जरूरत से ज्यादा ई-रिक्शा और ऑटो जमा होने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता बढ़ाई जा सकेगी जहां अभी अपेक्षाकृत कम वाहन चलते हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस पर भी सख्ती
ई-रिक्शा संचालन में चालक की पात्रता पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चालक के पास संबंधित वाहन चलाने के लिए जरूरी वैध ड्राइविंग लाइसेंस और निर्धारित दस्तावेज होने चाहिए। व्यावसायिक परिवहन वाहन चलाने से संबंधित आयु और अन्य नियमों का पालन भी जरूरी होगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिना जरूरी दस्तावेज या निर्धारित अनुमति के वाहन चलाने वालों पर परिवहन और यातायात नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जाम कम करना सबसे बड़ी चुनौती
पटना में पिछले कुछ वर्षों में ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ी है। छोटी दूरी के लिए सस्ता और आसानी से उपलब्ध साधन होने के कारण यात्रियों में इसकी मांग भी काफी है। लेकिन निर्धारित स्टैंड और रूट व्यवस्था के अभाव में कई प्रमुख चौराहों और सड़कों पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है। जोन आधारित व्यवस्था के जरिए प्रशासन इस समस्या को नियंत्रित करना चाहता है। वाहन तय रूट पर चलेंगे तो उनकी निगरानी भी आसान होगी और अलग-अलग मार्गों पर यात्री वाहनों का बेहतर वितरण किया जा सकेगा।
यात्रियों को भी होगा फायदा
रूट आधारित व्यवस्था से यात्रियों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि कौन सा ई-रिक्शा या ऑटो किस इलाके तक जाएगा। जोन के आधार पर वाहनों की पहचान की व्यवस्था होने से बाहर से आने वाले यात्रियों को भी सही वाहन चुनने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही चालक और वाहन से संबंधित रिकॉर्ड प्रशासन के पास होने से यात्री सुरक्षा की व्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायता मिलेगी।
पटना की नई परिवहन व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जोन और रूट से जुड़े नियमों को जमीन पर कितनी सख्ती से लागू किया जाता है। प्रशासन को वाहन चालकों के साथ यात्रियों को भी नई व्यवस्था के बारे में जागरूक करना होगा। ई-रिक्शा शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उन्हें सड़कों से हटाने के बजाय निर्धारित रूट, परमिट और नियमों के तहत व्यवस्थित तरीके से संचालित करना यातायात प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।