मुजफ्फरपुर। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने शिक्षकों को लेकर बड़ा चुनावी वादा किया है। बुधवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि एमएलसी चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार जीतते हैं तो शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ दिलाया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि वे ऐसा नहीं कर सके तो दोबारा वोट मांगने नहीं आएंगे।

प्रशांत किशोर तिरहुत शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुजफ्फरपुर पहुंचे थे। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. विमोहन कुमार और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्यामनंदन यादव ने नामांकन दाखिल किया। इस दौरान प्रशांत किशोर ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए शिक्षक और स्नातक मतदाताओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं और उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं तो शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने इसे केवल चुनावी घोषणा तक सीमित नहीं रखते हुए कहा कि वादा पूरा नहीं हुआ तो वे फिर मतदाताओं से वोट मांगने नहीं आएंगे।

जन सुराज की ओर से शिक्षक मतदाताओं के लिए सम्मान, सातवां वेतनमान और विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों की समस्याओं के समाधान जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। वित्तपोषित और वित्तरहित संस्थानों से जुड़े शिक्षकों की समस्याओं के समाधान और शेष शिक्षकों के समायोजन की बात भी पार्टी की ओर से कही गई है।

प्रशांत किशोर ने स्नातक युवाओं के मुद्दे को भी चुनावी मंच से उठाया। उन्होंने तिरहुत क्षेत्र के बेरोजगार स्नातकों के लिए 10 हजार रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया। उन्होंने कहा कि विधान परिषद चुनाव किसी सरकार को बनाने या गिराने का चुनाव नहीं है, बल्कि सरकार को जवाबदेह बनाने और उसकी नीतियों पर नजर रखने का अवसर है।

इस दौरान प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव के समय लोगों को दी गई 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे के जरिए लोगों की उम्मीदों और अपेक्षाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई। यह उनका राजनीतिक आरोप है। उन्होंने कहा कि अब मतदाताओं को यह बताना होगा कि वे जागरूक हो चुके हैं और उनके सामने नया राजनीतिक विकल्प मौजूद है।

प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में मतदाताओं से जन सुराज के उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है। यहां ऐसे मतदाता मतदान करते हैं जो शिक्षा और सामाजिक मुद्दों से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में उनका फैसला प्रदेश की राजनीति में भी संदेश देने वाला हो सकता है।

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज ने पहले भूषण झा को उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन बाद में उनकी जगह श्यामनंदन यादव को प्रत्याशी बनाया गया। भूषण झा के निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के बाद पार्टी ने उम्मीदवार में बदलाव किया था। वहीं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. विमोहन कुमार मैदान में हैं।

चुनाव को लेकर तिरहुत क्षेत्र में भी गतिविधियां तेज हैं। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची को चुनाव से पहले अंतिम रूप दिया गया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 59 हजार और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में करीब 4,200 मतदाताओं के होने की जानकारी सामने आई थी।

जन सुराज इस चुनाव में खास तौर पर शिक्षा, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। प्रशांत किशोर का कहना है कि बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी कम होनी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने तिरहुत क्षेत्र में बेरोजगार स्नातकों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया है।

एमएलसी चुनाव के दौरान शिक्षकों को सातवां वेतनमान देने का मुद्दा बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सीधे शिक्षक मतदाता होते हैं, इसलिए वेतन, सेवा शर्तें, सम्मान और लंबित समस्याएं चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा बन रही हैं। जन सुराज ने इसी मतदाता वर्ग को ध्यान में रखते हुए अपनी घोषणाओं को आगे रखा है।

प्रशांत किशोर के मुजफ्फरपुर दौरे और दोनों उम्मीदवारों के नामांकन के साथ तिरहुत की शिक्षक और स्नातक सीटों पर चुनावी मुकाबला तेज हो गया है। अब अलग-अलग दल अपने उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार और संपर्क अभियान को गति दे रहे हैं।

फिलहाल प्रशांत किशोर का सातवां वेतनमान और 10 हजार रोजगार का वादा चुनावी चर्चा के केंद्र में है। इन वादों पर अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा। चुनाव परिणाम के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि तिरहुत के शिक्षक और स्नातक मतदाता किस उम्मीदवार पर भरोसा जताते हैं।

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