Bihar बिहार। बिहार चुनाव 2025 के मद्देनजर महागठबंधन और RLM (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में कहा कि महागठबंधन केवल शोर मचाने में लगा है, लेकिन जनता के बीच उनके मुद्दों की कोई वास्तविक चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने सीधे तौर पर महागठबंधन के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता पहले ही उन्हें नकार चुकी है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, "जब लालू प्रसाद यादव 15 साल तक बिहार की सत्ता में थे, तब दलितों और अति पिछड़े परिवारों की महिलाओं और पुरुषों को वार्ड सदस्य बनने की अनुमति नहीं दी गई। यह समाज के कमजोर वर्ग के साथ अन्याय था।" उन्होंने जोर देकर कहा कि NDA सरकार के सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने तुरंत मौजूदा प्रावधानों में बदलाव किया, जिससे पिछड़े समुदाय और दलितों का प्रतिनिधित्व बढ़ा और उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा।
RLM अध्यक्ष ने महागठबंधन के नेताओं पर आरोप लगाया कि अब जब सत्ता उनके हाथ से निकल गई है, तो वे फिर से प्रलोभन और राजनीतिक चालबाजी का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता उनकी असली पहचान जान चुकी है और उनके दावे और वादे अब कारगर नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने महागठबंधन की SIR योजना को भी निशाने पर लिया और कहा, "उन्होंने SIR पर बहुत शोर मचाया, लेकिन इसे जनता तक पहुंचाने में वे विफल रहे। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राजनीतिक परिवर्तन के बावजूद RLM और NDA सरकार ने समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों के हितों के लिए काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में सामाजिक समानता और प्रतिनिधित्व के मामले में स्पष्ट सुधार हुआ है, जिसे जनता ने अनुभव किया है।
उन्होंने महागठबंधन पर यह भी आरोप लगाया कि उनके नेता केवल सत्ता में वापसी के लिए प्रलोभन और पुराने मुद्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने जनता से अपील की कि वे वास्तविक सुधार और कामकाज को देखें, न कि केवल राजनीतिक वादों और प्रचार को। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा का यह बयान चुनावी अभियान में RLM और NDA की स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछड़े और दलित वर्ग के हितों के लिए किए गए सुधारों को चुनावी प्रचार का मुख्य आधार बनाया जाएगा। इस बयान के बाद महागठबंधन और RLM के बीच राजनीतिक विवाद और तेज होने की संभावना है। आगामी चुनाव में यह बयान और मुद्दे दोनों ही दलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।