Patna: 14 महीने बाद भी काम 10% नहीं, परियोजना की धीमी रफ्तार पर सवाल

पटना के हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल का काम शिलान्यास के 14 महीने बाद भी 10% पूरा नहीं हुआ है। जानें परियोजना में देरी की वजह और इसका महत्व

Update: 2026-08-07 04:37 GMT

पटना : पटना के हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल परियोजना की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। करीब 14 महीने पहले शिलान्यास होने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य 10 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो पाया है। इस देरी को लेकर परियोजना की प्रगति और कार्य एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने और पटना जंक्शन पर दबाव कम करने के उद्देश्य से इस टर्मिनल की योजना बनाई गई थी। लेकिन निर्माण की धीमी गति के कारण इसके समय पर पूरा होने को लेकर संशय बना हुआ है।
14 महीने बाद भी काम की रफ्तार धीमी
हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल का शिलान्यास बड़े उद्देश्यों के साथ किया गया था। उम्मीद थी कि निर्माण पूरा होने के बाद यात्रियों को एक आधुनिक टर्मिनल की सुविधा मिलेगी और रेलवे संचालन को भी राहत मिलेगी।
लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि लंबे समय बाद भी परियोजना का शुरुआती काम ही आगे बढ़ पाया है।
पटना जंक्शन का दबाव कम करने की योजना
पटना जंक्शन पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करने के लिए हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल को महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।
इसके शुरू होने के बाद—
यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
ट्रेनों के संचालन को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
पटना जंक्शन पर भीड़ का दबाव कम हो सकता है।
शहर में यातायात व्यवस्था को राहत मिल सकती है।
देरी से बढ़ी चिंता
परियोजना में हो रही देरी से यात्रियों और स्थानीय लोगों में निराशा है। लोगों का कहना है कि बड़ी घोषणाओं के बाद काम की गति भी उसी स्तर की होनी चाहिए, ताकि तय समय में योजनाओं का लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में जमीन, डिजाइन, तकनीकी मंजूरी और निर्माण एजेंसी से जुड़े कारणों से देरी हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक धीमी प्रगति चिंता का विषय बनती है।
प्रशासन के सामने चुनौती
अब प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने चुनौती है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
समय पर पूरा होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पटना के परिवहन ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।

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