नालंदा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने शुक्रवार को नालंदा जिले में निर्माणाधीन सालेपुर-राजगीर फोरलेन सड़क परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना के निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी उनके साथ मौजूद रहे।

नीतीश कुमार ने सड़क निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल को निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर किया जाए और सड़क को निर्धारित समयसीमा के भीतर यातायात के लिए तैयार किया जाए। उन्होंने बरसात तक सड़क चालू करने का लक्ष्य बताते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से काम करने की हिदायत दी।

निरीक्षण के दौरान नीतीश कुमार ने निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति, सड़क की गुणवत्ता और परियोजना को पूरा करने में हो रही देरी की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण की प्रगति के संबंध में बातचीत की और कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क जैसी महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी है, ताकि आम लोगों को जल्द इसका लाभ मिल सके।

सालेपुर से राजगीर तक बन रही यह फोरलेन सड़क नालंदा जिले की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य पटना और राजगीर के बीच सड़क संपर्क को अधिक सुगम बनाना है। सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद राजगीर आने वाले पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, सालेपुर से राजगीर तक लगभग 26.66 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन मार्ग की योजना तैयार की गई है। यह सड़क बौद्ध सर्किट से जुड़े यातायात को बेहतर बनाने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नीतीश कुमार ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में तेजी के साथ निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन भी जरूरी है। सड़क बनने के बाद उसकी मजबूती और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।

बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण परियोजना को पूरा करने में देरी हो रही है। इसी स्थिति को लेकर नीतीश कुमार ने अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सड़क निर्माण विभाग को कार्य की नियमित निगरानी करने और परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।

इस फोरलेन सड़क का निर्माण पूरा होने से राजगीर की सड़क संपर्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार होने की संभावना है। राजगीर बिहार का प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। ऐसे में बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

राजगीर बौद्ध और जैन धर्म से जुड़े प्रमुख स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां स्थित अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर, पर्यटन स्थल और अन्य महत्वपूर्ण संस्थान भी लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। फोरलेन सड़क तैयार होने के बाद इन स्थानों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

सड़क निर्माण परियोजना का लाभ केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की संभावना है। विशेष रूप से किसानों, छोटे व्यापारियों और दैनिक यात्रियों के लिए यह सड़क महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है। इसके अलावा स्थानीय व्यापार और परिवहन सेवाओं को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार पहले भी सालेपुर-राजगीर फोरलेन परियोजना का निरीक्षण कर चुके हैं। जून 2026 में उन्होंने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के साथ निर्माणाधीन सड़क का जायजा लिया था और अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। उस दौरान भी परियोजना की गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा में निर्माण पूरा करने पर जोर दिया गया था।

इससे पहले अगस्त 2025 में सालेपुर से राजगीर तक फोरलेन सड़क परियोजना का शिलान्यास किया गया था। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत 862 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। इस मार्ग को नूरसराय, अहियापुर और सिलाव होते हुए राजगीर से जोड़ने की योजना है।

शुक्रवार के निरीक्षण के बाद एक बार फिर सड़क निर्माण की रफ्तार और परियोजना की समयसीमा चर्चा में आ गई है। अधिकारियों के सामने अब निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने की चुनौती है।

नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से आम जनता को परेशानी होती है। इसलिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना चाहिए। निर्माण कार्य में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाना जरूरी है।

सालेपुर-राजगीर फोरलेन परियोजना पूरी होने के बाद पटना और राजगीर के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। इससे नालंदा जिले की सड़क व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पर्यटन और व्यापार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। फिलहाल इस सड़क परियोजना को जल्द पूरा करना संबंधित अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी बन गई है।

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