Bihar: लखीसराय में आयोजित नीट यूजी-2026 की पुनर्परीक्षा में पकड़े गए सॉल्वर गैंग मामले की जांच अब और गहराती जा रही है। इस पूरे नेटवर्क का लिंक अब मुजफ्फरपुर से जुड़ गया है। पुलिस ने इस मामले में दो एमबीबीएस छात्रों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद जांच टीम ने कांटी और भगवानपुर इलाके में छापेमारी और पूछताछ तेज कर दी है।
गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर के कांटी थाना क्षेत्र के हरचंदा गांव निवासी विवेक कुमार और सदर थाना क्षेत्र के भगवानपुर स्थित श्रमजीवी नगर निवासी अर्पित सिंह शामिल हैं। दोनों गया के मगध मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चौथे वर्ष के छात्र हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों के घर पहुंचकर परिजनों और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई है।
कांटी इलाके में पुलिस को विवेक कुमार का घर बंद मिला, जिसके बाद ग्रामीणों और रिश्तेदारों से पूछताछ की गई। ग्रामीणों ने बताया कि विवेक के पिता सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के अमेठी में तैनात हैं। परिवार पिछले कुछ महीनों से गांव नहीं आया है। पुलिस अब विवेक के संपर्कों और नेटवर्क की जांच कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि विवेक की शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसने इंटर की पढ़ाई एक ऐसे संस्थान से की जहां मुख्य रूप से कला संकाय की पढ़ाई होती है, जबकि उसने विज्ञान वर्ग से परीक्षा दी थी। वर्ष 2022 में उसने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कर मगध मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था।
ग्रामीणों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उसने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया और गांव से संपर्क भी काफी कम कर दिया था।
इस पूरे सॉल्वर गैंग का पहला बड़ा खुलासा नालंदा जिले में हुआ था, जहां वाहन जांच के दौरान तीन संदिग्धों को पकड़ा गया था। जांच में सामने आया कि यह गिरोह 50 से 60 लाख रुपये लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का ठेका लेता था। इसके बाद पुलिस ने कई एडमिट कार्ड, मोबाइल फोन, वाहन और नकदी भी बरामद की थी।
नालंदा केस की एफआईआर में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण समेत उत्तर बिहार के कई जिलों के युवकों के नाम सामने आए थे। पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि कथित मास्टरमाइंड अभी फरार बताया जा रहा है।
ताजा गिरफ्तारी के बाद पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क सिर्फ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मेडिकल और तकनीकी संस्थानों से जुड़े छात्र भी शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब मोबाइल डाटा, बैंक लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं और जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं।