मुजफ्फरपुर। बिहार में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेशी नागरिकों के भारतीय पहचान पत्र और पासपोर्ट बनवाने वाले नेटवर्क के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मुजफ्फरपुर पुलिस ने मामले के कथित मास्टरमाइंड मो. एजाज कमर को पटना से गिरफ्तार किया है। एजाज पर फर्जी तरीके से आधार कार्ड तैयार कराने और उसके आधार पर एक बांग्लादेशी नागरिक का भारतीय पासपोर्ट जारी कराने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद रविवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले में अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस के मुताबिक मो. एजाज कमर मूल रूप से बिहार के आरा का रहने वाला है। हालांकि उसका परिवार कई दशक पहले पंजाब के चंडीगढ़ के पलटाना इलाके में जाकर बस गया था। एजाज उच्च शिक्षित बताया जा रहा है और उसने एमटेक की पढ़ाई की है। पुलिस की जांच में उसके पारिवारिक और दूसरे संपर्कों से जुड़ी जानकारियां भी सामने आई हैं। उसकी पत्नी लंदन में नौकरी करती है, जबकि परिवार के कई सदस्य अमेरिका में रहते हैं।

इस मामले की जांच के दौरान एजाज का नाम सामने आने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। जांच में मिले सुरागों के आधार पर मुजफ्फरपुर पुलिस ने पटना में उसकी मौजूदगी की जानकारी जुटाई और कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उससे जुड़े अन्य लोगों और कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगाल रही है।

आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए फर्जी तरीके से आधार कार्ड तैयार किए गए और इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल आगे पासपोर्ट बनवाने में किया गया। मामला तब और गंभीर हो गया, जब जांच में एक बांग्लादेशी नागरिक के लिए भारतीय पासपोर्ट जारी कराए जाने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की और दस्तावेज तैयार करने से लेकर उनके सत्यापन तक की प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू की।

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि विदेशी नागरिक के नाम पर भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए। आधार कार्ड तैयार कराने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, उनमें दी गई जानकारी कहां से जुटाई गई और बाद में उसी पहचान के आधार पर पासपोर्ट की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

एजाज कमर की गिरफ्तारी को पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उसे पूरे प्रकरण का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। हालांकि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। पुलिस अब उससे जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है, ताकि पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

इस मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे पहले पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ और जांच में मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस लगातार आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान एजाज कमर तक पहुंचने में सफलता मिली। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और क्या इसी तरीके से अन्य विदेशी नागरिकों के लिए भी भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए थे।

जांच का एक अहम हिस्सा उन दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल भी है, जिनके आधार पर संबंधित बांग्लादेशी नागरिक की पहचान भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की गई। आधार और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों को तैयार कराने के लिए कई स्तरों पर जानकारी और सत्यापन की जरूरत होती है। ऐसे में पुलिस यह भी जांच रही है कि प्रक्रिया के दौरान कहीं गलत जानकारी या कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया।

एजाज के उच्च शिक्षित होने और उसके परिवार के सदस्यों के विदेश में रहने की जानकारी भी जांच के दौरान सामने आई है। हालांकि इन तथ्यों से परिवार के अन्य सदस्यों की किसी आपराधिक भूमिका की पुष्टि नहीं होती। पुलिस की जांच का केंद्र फिलहाल एजाज की कथित भूमिका और उससे जुड़े संपर्क हैं।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि एजाज का संबंधित बांग्लादेशी नागरिक से संपर्क किस तरह हुआ था। क्या दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से संपर्क स्थापित किया गया था, इसकी जांच की जा रही है। इसके साथ ही कथित फर्जी आधार कार्ड बनाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की पहचान भी की जा रही है।

मामले में पासपोर्ट जारी होने तक की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आवेदन के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और उनमें दर्ज पते एवं अन्य जानकारियों का सत्यापन किस तरह हुआ। यदि किसी स्तर पर गलत दस्तावेज या जानकारी दी गई थी तो उसमें शामिल लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

विदेशी नागरिक के लिए कथित तौर पर फर्जी भारतीय पहचान तैयार करने का मामला सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर माना जा रहा है। इसलिए पुलिस केवल एक पासपोर्ट के मामले तक जांच सीमित रखने के बजाय इससे जुड़े संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है। गिरफ्तार लोगों के मोबाइल फोन, संपर्क और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड से भी महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है।

मुजफ्फरपुर पुलिस एजाज की गिरफ्तारी के बाद अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित नेटवर्क का संचालन किस तरह किया जा रहा था। क्या इसके लिए अलग-अलग जिलों में लोगों की मदद ली जाती थी और दस्तावेज तैयार कराने के बदले किसी तरह का आर्थिक लेन-देन होता था, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट हो सकेंगे।

एजाज कमर को गिरफ्तार करने के बाद रविवार को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है। पुलिस अब अन्य संभावित आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि फर्जी आधार और पासपोर्ट तैयार कराने का यह मामला केवल एक विदेशी नागरिक तक सीमित था या इसके तार दूसरे मामलों से भी जुड़े हैं।

फिलहाल पुलिस की कार्रवाई का केंद्र कथित मास्टरमाइंड एजाज कमर और उससे जुड़े लोगों के नेटवर्क को सामने लाना है। इस मामले में आगे होने वाली गिरफ्तारियों और दस्तावेजों की जांच से पूरे प्रकरण की और परतें खुल सकती हैं।

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