खैरा। खैरा-गरही मुख्य मार्ग पर दक्षिणी क्षेत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ललदैया काजवे पुल क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। पुल के खराब होने के कारण दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है। रोजाना इस मार्ग से आवागमन करने वाले ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों और नौकरी-पेशा लोगों को अब वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उन्हें कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है और समय के साथ आर्थिक खर्च भी बढ़ गया है।

गिद्धेश्वर और पूर्वतार के बीच स्थित यह काजवे पुल लंबे समय से दक्षिणी क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन की महत्वपूर्ण कड़ी रहा है। आसपास के कई गांवों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी मार्ग से खैरा और अन्य प्रमुख स्थानों तक पहुंचते हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई है।

पांच से दस किलोमीटर बढ़ गई दूरी

पुल से आवागमन बाधित होने के बाद ग्रामीणों को दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वैकल्पिक मार्गों के कारण कई लोगों की यात्रा पांच-छह किलोमीटर से लेकर करीब 10 किलोमीटर तक लंबी हो गई है। इससे खासकर उन लोगों को अधिक परेशानी हो रही है, जिन्हें प्रतिदिन स्कूल, कॉलेज, बाजार या नौकरी के सिलसिले में आना-जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिस दूरी को कम समय में तय कर लिया जाता था, अब उसी यात्रा में काफी अधिक समय लग रहा है। बरसात के मौसम में वैकल्पिक रास्तों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण होने के कारण समस्या और बढ़ जाती है।

विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी

पुल क्षतिग्रस्त होने का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों से छात्र-छात्राएं प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते थे। पुल से आवागमन बाधित होने के बाद उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह स्कूल जाने और दोपहर बाद घर लौटने के समय बच्चों को अधिक परेशानी होती है। अतिरिक्त दूरी के कारण उन्हें समय से पहले घर से निकलना पड़ रहा है। वहीं, बरसात के दौरान रास्ते में जलभराव या कीचड़ की स्थिति होने पर बच्चों की मुश्किल और बढ़ सकती है।

किसानों और कामकाजी लोगों पर भी असर

ललदैया काजवे पुल केवल विद्यार्थियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। किसान भी अपनी उपज और कृषि संबंधी सामान के आवागमन के लिए इस रास्ते पर निर्भर रहते हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद किसानों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है।

इसी तरह नौकरी-पेशा लोग और छोटे कारोबारी भी रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। अतिरिक्त दूरी के कारण उनके आने-जाने में अधिक समय लग रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था पहले से सीमित होने के कारण पुल की खराब स्थिति ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग

ग्रामीणों के अनुसार ललदैया काजवे पुल दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। पुल के क्षतिग्रस्त होने से केवल तत्काल आवागमन की समस्या ही नहीं पैदा हुई है, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक संपर्क पर भी असर पड़ रहा है।

बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षण संस्थानों और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को अब लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। किसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी अतिरिक्त समय लग सकता है, जिससे ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।

जल्द मरम्मत की मांग

पुल की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि पुल की मरम्मत समय रहते नहीं की गई तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।

बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हिस्से को और नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग मौके का निरीक्षण कर पुल की वास्तविक स्थिति का आकलन करे और आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द शुरू कराया जाए।

स्थायी समाधान की जरूरत

ग्रामीणों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा। काजवे पुल पर लंबे समय से निर्भर आबादी को देखते हुए मजबूत और सुरक्षित पुल की आवश्यकता है। ऐसा होने पर दक्षिणी क्षेत्र के गांवों का संपर्क वर्षभर सुचारु बना रहेगा और बरसात के दौरान आवागमन बाधित होने की समस्या कम होगी।

लोगों का यह भी कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं का मजबूत होना जरूरी है। आवागमन बाधित होने से शिक्षा, रोजगार, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है।

ललदैया काजवे पुल के क्षतिग्रस्त होने से दक्षिणी क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। ग्रामीणों को पांच से 10 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। ऐसे में लोगों की नजर अब प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर है। ग्रामीणों की मांग है कि पुल की जल्द मरम्मत कराकर आवागमन बहाल किया जाए, ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके।

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