खगड़िया (बिहार)। कई दिनों तक लगातार बढ़ते जलस्तर के बाद खगड़िया जिले में बुधवार को गंगा और बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में कमी दर्ज की गई। हालांकि, संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-एक, खगड़िया की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार सुबह छह बजे खगड़िया के खारा धार जलद्वार के पास गंगा नदी का जलस्तर 35.05 मीटर दर्ज किया गया। वहीं, खगड़िया एनएच-31 ब्रिज के अघोरी स्थान के पास बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर 37.02 मीटर रिकॉर्ड किया गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि बुधवार सुबह दोनों प्रमुख नदियों की जलस्तर प्रवृत्ति घटने की ओर रही। इससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की है। हालांकि, जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए निगरानी लगातार जारी रखी जा रही है।

पिछले कुछ दिनों से गंगा और बूढ़ी गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही थी। इसके कारण नदी किनारे बसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई थी। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई थी।

इधर, तिब्बत में हुई घटना के बाद नदियों के जलस्तर में फिर से वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। इसी को देखते हुए खगड़िया जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है।

जिला प्रशासन की ओर से सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहने और स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय बनाकर काम करने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संभावित बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

प्रशासन ने सभी अंचल अधिकारियों (सीओ) और थानाध्यक्षों को भी सतर्क कर दिया है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी किनारे जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखने को कहा गया है।

प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों की भी समीक्षा की जा रही है। नावों की उपलब्धता, राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधाओं और बचाव दलों की तैयारियों को लेकर संबंधित विभागों को सक्रिय रहने को कहा गया है।

बाढ़ नियंत्रण विभाग लगातार नदियों के जलस्तर की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल जलस्तर में कमी दर्ज की गई है, लेकिन मौसम और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदियों का जलस्तर कम होने से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए वे अभी भी चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन की तैयारी मजबूत रहनी चाहिए ताकि अचानक स्थिति बिगड़ने पर परेशानी न हो।

खगड़िया जिला हर साल बाढ़ की समस्या से प्रभावित होता रहा है। गंगा और बूढ़ी गंडक जैसी बड़ी नदियों के कारण जिले के कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से समय रहते निगरानी और तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल नदियों का जलस्तर घट रहा है, लेकिन प्रशासन ने अपनी सतर्कता कम नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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