पटना। बिहार की राजनीति में एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मांझी के बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या तेजस्वी यादव शराब पीते हैं और क्या शराबबंदी वाले बिहार में भी ऐसा संभव है।

दरअसल, पूरा मामला 17 अगस्त को आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा है। इस दिन माउंटेनमैन के नाम से प्रसिद्ध दशरथ मांझी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में तेजस्वी यादव भाषण दे रहे थे। इसी दौरान उनकी जुबान फिसल गई और उन्होंने दशरथ मांझी की जगह जीतनराम मांझी का नाम ले लिया।

हालांकि, श्रोताओं द्वारा ध्यान दिलाए जाने के बाद तेजस्वी यादव ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली और दशरथ मांझी का नाम दोहराया। लेकिन इस छोटी सी गलती को जीतनराम मांझी ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया और तेजस्वी यादव पर तंज कस दिया।

जीतनराम मांझी ने उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान के माध्यम से तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी का नाम लेने के बजाय उनका नाम लिया, उससे कई सवाल खड़े होते हैं।

मांझी ने इसी संदर्भ में शराब को लेकर भी टिप्पणी की और सवाल किया कि क्या तेजस्वी यादव शराब का सेवन करते हैं। उन्होंने बिहार में लागू शराबबंदी का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति शराब पीता है तो यह कानून का उल्लंघन होगा।

मांझी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

आरजेडी नेताओं ने किया पलटवार

जीतनराम मांझी के बयान के बाद आरजेडी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव की एक सामान्य भाषण की गलती को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

आरजेडी नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दलों के नेता जनता के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। पार्टी का कहना है कि तेजस्वी यादव ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली थी, इसलिए इस मामले को बढ़ाना बेवजह है।

बिहार में शराबबंदी बना राजनीतिक मुद्दा

बिहार में शराबबंदी लंबे समय से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है। राज्य में शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लागू है। सरकार का दावा है कि शराबबंदी से सामाजिक बदलाव आया है, जबकि विपक्ष समय-समय पर इसके क्रियान्वयन और अवैध शराब की घटनाओं को लेकर सवाल उठाता रहा है।

ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक नेता के शराब सेवन को लेकर सवाल उठना बिहार की राजनीति में तुरंत चर्चा का विषय बन जाता है।

दशरथ मांझी कार्यक्रम में हुई थी घटना

17 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी को याद करते हुए उनके संघर्ष और योगदान का उल्लेख किया था। भाषण के दौरान नाम बोलने में हुई गलती को उन्होंने तुरंत ठीक कर लिया था।

दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर रास्ता बनाने के अपने काम के कारण देशभर में पहचान बनाई थी। उनके जीवन और संघर्ष को लेकर हर साल उनकी पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

सियासी बयानबाजी तेज

तेजस्वी यादव और जीतनराम मांझी बिहार की राजनीति के दो प्रमुख चेहरे हैं। दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। इस बार एक भाषण में हुई छोटी सी गलती को लेकर दोनों खेमों में जुबानी जंग शुरू हो गई है।

जहां जीतनराम मांझी ने इसे लेकर सवाल खड़े किए हैं, वहीं आरजेडी इसे अनावश्यक विवाद बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गर्मा सकता है।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा जीतनराम मांझी के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने तेजस्वी यादव के नाम भूलने की घटना को शराब से जोड़कर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, तेजस्वी यादव या आरजेडी की ओर से शराब सेवन को लेकर लगाए गए सवालों पर कोई सीधा जवाब सामने नहीं आया है।

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