पटना। गंगा के बदलते प्रवाह और बढ़ते जलदाब के बीच काजीकोरैया–राघोपुर तटबंध की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। पिछले कई दिनों से तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर लगातार निगरानी और सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इसी बीच शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। उन्होंने तटबंध की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण करने के साथ गंगा की धारा, जलदाब और कटाव से पैदा हो रहे खतरे की विस्तृत जानकारी ली।

मुख्यमंत्री के साथ ऊर्जा मंत्री शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल, पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने मौके पर चल रहे बचाव एवं सुरक्षात्मक कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से स्थिति की जानकारी हासिल की।

तटबंध पर पिछले कई दिनों से युद्धस्तर पर काम चल रहा है। गंगा की धारा में लगातार बदलाव के कारण कुछ स्थानों पर दबाव बढ़ने की स्थिति सामने आई है। प्रशासन का पूरा जोर किसी भी परिस्थिति में तटबंध को सुरक्षित रखने और आसपास की आबादी को संभावित खतरे से बचाने पर है।

मुख्यमंत्री ने मौके पर देखी तटबंध की स्थिति

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तटबंध के संवेदनशील हिस्सों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि गंगा का मौजूदा प्रवाह किस दिशा में है, किन स्थानों पर सबसे ज्यादा दबाव बन रहा है और कटाव रोकने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद इंजीनियरों और विभागीय अधिकारियों से सुरक्षात्मक कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। उन्होंने तटबंध की निगरानी में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने और जरूरत के अनुसार संसाधनों तथा कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

गंगा का प्रवाह बदलने के कारण नदी किनारे के क्षेत्रों में कटाव का खतरा बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार तटबंध की निगरानी कर रही हैं।

पथ निर्माण मंत्री ने दी पूरी जानकारी

निरीक्षण के दौरान पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र ने मुख्यमंत्री को तटबंध की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि गंगा की धारा में लगातार बदलाव हो रहा है और संवेदनशील स्थानों पर पानी का दबाव बढ़ने की स्थिति को देखते हुए विभागीय टीम पूरी तत्परता से काम कर रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि जहां भी कटाव या दबाव की स्थिति दिखाई दे रही है, वहां तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इंजीनियर और कर्मचारी मौके पर तैनात हैं तथा हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी संवेदनशील स्थान पर खतरे के संकेत मिलने पर बिना देरी के कार्रवाई की जाए।

युद्धस्तर पर चल रहे बचाव कार्य

काजीकोरैया–राघोपुर तटबंध को सुरक्षित रखने के लिए पिछले कई दिनों से युद्धस्तर पर बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। संवेदनशील हिस्सों पर कटाव रोकने के लिए आवश्यक सामग्री पहुंचाने के साथ विभागीय टीमें लगातार काम कर रही हैं।

नदी के तेज बहाव के कारण तटबंध के किसी हिस्से पर अचानक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में अधिकारियों को चौबीसों घंटे निगरानी बनाए रखने की आवश्यकता है।

प्रशासन की कोशिश है कि समस्या गंभीर होने से पहले ही कमजोर या संवेदनशील हिस्सों की पहचान कर उन्हें मजबूत कर दिया जाए। इसके लिए जमीनी निरीक्षण के साथ तकनीकी स्तर पर भी नदी के प्रवाह और जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।

गंगा के बदलते प्रवाह ने बढ़ाई चिंता

तटबंध की सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ी चुनौती गंगा की बदलती धारा बताई जा रही है। नदी का प्रवाह किसी विशेष हिस्से की ओर केंद्रित होने पर वहां जलदाब बढ़ सकता है। लगातार दबाव की स्थिति में कटाव का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसी वजह से केवल जलस्तर ही नहीं बल्कि नदी के प्रवाह की दिशा पर भी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञ और इंजीनियर संवेदनशील क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं।

कटाव के संकेत मिलने वाले स्थानों पर प्राथमिकता से सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं, ताकि तटबंध को नुकसान से बचाया जा सके।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में समीक्षा

मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी से प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता स्पष्ट हुई। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने भी स्थिति की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। बाढ़ या तटबंध से जुड़े खतरे की स्थिति में जल संसाधन, पथ निर्माण, ऊर्जा और स्थानीय प्रशासन समेत कई विभागों को एक साथ काम करना पड़ता है।

ऐसे में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सूचना के आदान-प्रदान और आवश्यक कार्रवाई में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।

आसपास की आबादी की सुरक्षा प्राथमिकता

तटबंध की सुरक्षा सीधे आसपास रहने वाली आबादी से जुड़ी हुई है। यदि किसी स्थान पर तटबंध को गंभीर नुकसान पहुंचता है तो आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा पैदा हो सकता है।

इसी कारण प्रशासन पहले से हाई अलर्ट पर है। स्थानीय स्तर पर भी परिस्थितियों पर नजर रखी जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर राहत और बचाव से संबंधित व्यवस्थाओं को सक्रिय करने की तैयारी रखी जा सकती है।

मुख्यमंत्री के ग्राउंड जीरो पर पहुंचने से स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की सक्रियता और बढ़ गई है।

चौबीसों घंटे निगरानी पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तटबंध की लगातार निगरानी करने और संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता रखने को कहा। नदी का व्यवहार तेजी से बदल सकता है, इसलिए नियमित अंतराल पर स्थिति की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है।

विभागीय अधिकारियों और इंजीनियरों को फील्ड में बने रहने तथा किसी भी नई स्थिति की जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन और बचाव सामग्री भी संवेदनशील स्थानों तक पहुंचाई जाएगी।

हालात पर सरकार की सीधी नजर

काजीकोरैया–राघोपुर तटबंध पर पिछले कई दिनों से जारी हाई अलर्ट के बीच मुख्यमंत्री का स्वयं मौके पर पहुंचना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने जमीनी स्थिति देखने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली और सुरक्षात्मक कार्यों को लगातार जारी रखने के निर्देश दिए।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता गंगा के बदलते प्रवाह से तटबंध पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित करना और कटाव से बचाना है। विभागीय टीमें संवेदनशील स्थानों पर लगातार काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तटबंध की सुरक्षा और लोगों की जान-माल की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। हालात में किसी भी बदलाव पर तत्काल कार्रवाई की जाए और सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ तैयार रहें।

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