Mumbai मुंबई। महाराष्ट्र में दही हांडी यानी दहीकाला उत्सव को लेकर उत्साह के बीच शिवसेना (UBT) सांसद अनिल देसाई ने इस पर्व को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि दहीकाला उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है और यह महाराष्ट्र की संस्कृति और पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। मुंबई, ठाणे और राज्य के अन्य हिस्सों में हर साल दही हांडी उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर बांधी गई दही हांडी को तोड़ने का प्रयास करते हैं। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और पूरे माहौल में उत्सव का रंग दिखाई देता है।
अनिल देसाई ने कहा कि दहीकाला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह लोगों को एकजुट करने वाला सामाजिक और सांस्कृतिक पर्व भी है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा ने कई पीढ़ियों को जोड़ने का काम किया है और महाराष्ट्र की लोक संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। दही हांडी उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण बचपन में अपने साथियों के साथ मिलकर ऊंचाई पर रखी मटकी से माखन निकालते थे। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र में दही हांडी का आयोजन किया जाता है।
मुंबई में इस उत्सव को लेकर हर साल विशेष तैयारियां की जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में दही हांडी प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है, जिसमें कई गोविंदा मंडल हिस्सा लेते हैं। युवाओं में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है। हालांकि, दही हांडी आयोजनों के दौरान सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशासन और आयोजक गोविंदा पथकों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था करते हैं।
अनिल देसाई ने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे त्योहार समाज में आपसी जुड़ाव और भाईचारे को मजबूत करते हैं। दही हांडी उत्सव महाराष्ट्र के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है और हर साल लाखों लोग इसमें हिस्सा लेते हैं। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ महाराष्ट्र की परंपरा, उत्साह और सामूहिक भावना को भी दर्शाता है।
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