पटना। बिहार सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान के लिए बड़े स्तर पर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग अभियान शुरू करने जा रही है। अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के करीब छह करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। स्क्रीनिंग के बाद प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज की जाएगी। इसमें यह जानकारी शामिल होगी कि संबंधित व्यक्ति उच्च रक्तचाप यानी बीपी, मधुमेह, कैंसर या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित है या नहीं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित स्वास्थ्य अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारियों की समय रहते पहचान कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग के साथ डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
छह करोड़ लोगों की होगी जांच
अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्वास्थ्य जांच करना है। इस आयु वर्ग में बीपी और मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार शुरुआती चरण में बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते और लोग नियमित जांच नहीं कराते। ऐसे में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग के माध्यम से बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर करने का प्रयास किया जाएगा।
जांच के दौरान लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारियां जुटाई जाएंगी। जिन लोगों में किसी बीमारी के संकेत मिलेंगे, उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे गंभीर बीमारियों के मामलों की पहचान समय रहते करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आभा आईडी से जुड़ेगा स्वास्थ्य रिकॉर्ड
सरकार इस अभियान को डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से भी जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके तहत लोगों को आभा आईडी से जोड़कर उनके स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने पर जोर दिया जाएगा। आभा यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के माध्यम से किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को डिजिटल स्वरूप में व्यवस्थित किया जा सकता है।
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से मरीज के स्वास्थ्य इतिहास को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं तक जानकारी पहुंचाने में सुविधा हो सकती है। इससे अलग-अलग जगह इलाज कराने वाले मरीजों के लिए भी उनकी पुरानी स्वास्थ्य जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि स्वास्थ्य जांच के बाद मिलने वाली जानकारी केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रहे। उसे डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़कर भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर योजना बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सके।
एक करोड़ महिलाओं और किशोरियों की एनीमिया जांच
स्वास्थ्य अभियान में महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत एक करोड़ महिलाओं और किशोरियों की एनीमिया जांच का लक्ष्य रखा गया है। एनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी महिलाओं और किशोरियों में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या मानी जाती है। इसकी वजह से कमजोरी, थकान और कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
व्यापक स्तर पर एनीमिया जांच से उन महिलाओं और किशोरियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें उपचार या पोषण संबंधी सहायता की आवश्यकता है। जांच के परिणाम के आधार पर संबंधित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
बीमारी की पहचान पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री के संबोधन में स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों और इलाज तक सीमित रखने के बजाय बीमारी की रोकथाम और शुरुआती पहचान पर जोर दिखाई दिया। बीपी, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों की पहचान यदि शुरुआती चरण में हो जाए तो मरीज को समय पर चिकित्सकीय सलाह और उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
छह करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य अपने आप में बड़ा अभियान है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को व्यापक स्तर पर जांच व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और जांच के बाद मरीजों के फॉलोअप की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। स्क्रीनिंग में सामने आने वाले मामलों को उपचार व्यवस्था से जोड़ना भी अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
डिजिटल डेटा से स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी मदद
स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से सरकार को अलग-अलग बीमारियों की स्थिति समझने में भी मदद मिल सकती है। किस क्षेत्र में बीपी और मधुमेह के मामले अधिक हैं, किन इलाकों में एनीमिया की समस्या ज्यादा है और किन आयु वर्गों में किस तरह की स्वास्थ्य समस्या सामने आ रही है, इसका आकलन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य में स्वास्थ्य योजनाओं और संसाधनों की प्राथमिकता तय करने में भी सहायता मिल सकती है। साथ ही मरीजों के उपचार और फॉलोअप को व्यवस्थित करने की संभावना बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में स्वास्थ्य को लेकर व्यापक स्तर पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों की जांच हो, बीमारियों की समय रहते पहचान की जाए और नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा जाए।
बिहार में शुरू होने जा रहे इस व्यापक स्वास्थ्य अभियान के तहत एक ओर जहां 30 वर्ष से अधिक उम्र के करीब छह करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी, वहीं दूसरी ओर एक करोड़ महिलाओं और किशोरियों की एनीमिया जांच का लक्ष्य रखा गया है। यदि अभियान के तहत स्क्रीनिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और उपचार के बीच प्रभावी समन्वय कायम होता है, तो इससे राज्य में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।