पटना: बिहार में टोल टैक्स वसूली की व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की दिशा में नया सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत टोल शुल्क का भुगतान फास्टैग के जरिए किया जाएगा। इस नई प्रणाली को समझने और इसके संचालन का अध्ययन करने के लिए बिहार से एक टीम राजस्थान जाएगी। बताया जा रहा है कि राजस्थान में टोल प्रबंधन की जिस प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसी मॉडल का अध्ययन बिहार की टीम करेगी। टीम वहां टोल वसूली की प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था, फास्टैग से भुगतान और निगरानी प्रणाली के बारे में जानकारी जुटाएगी। इसके बाद बिहार में इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फास्टैग से कटेगा टोल शुल्क
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को टोल शुल्क भुगतान में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। फास्टैग के जरिए टोल शुल्क सीधे वाहन से जुड़े खाते से कट जाएगा। इससे नकद भुगतान की जरूरत कम होगी और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आ सकती है। फास्टैग आधारित व्यवस्था से टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाने और भुगतान प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। वाहन टोल प्वाइंट से गुजरते ही इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिए शुल्क काटा जा सकेगा।
राजस्थान मॉडल का होगा अध्ययन
बिहार से जाने वाली टीम राजस्थान में टोल सिस्टम के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसमें टोल बूथ के संचालन, वाहनों की पहचान, शुल्क निर्धारण और फास्टैग से जुड़ी तकनीक को समझा जाएगा। टीम यह भी देखेगी कि सिस्टम में किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में उसका समाधान किस तरह किया जाता है और टोल वसूली की निगरानी कैसे की जाती है।
वाहन चालकों को मिल सकती है राहत
नई प्रणाली का उद्देश्य वाहन चालकों के लिए टोल भुगतान को आसान बनाना है। फास्टैग आधारित भुगतान से समय की बचत होगी और लोगों को नकद राशि लेकर चलने की जरूरत कम पड़ेगी। साथ ही टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकती है। इससे व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक जाम की समस्या कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
अध्ययन के बाद तैयार होगी आगे की योजना
राजस्थान से लौटने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट संबंधित विभाग को सौंपेगी। रिपोर्ट में वहां की व्यवस्था, तकनीकी जरूरतों और बिहार में इसे लागू करने की संभावनाओं का उल्लेख किया जाएगा। इसके आधार पर राज्य में नए टोल सिस्टम को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। फिलहाल टीम के अध्ययन और रिपोर्ट के बाद ही नई व्यवस्था का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा।
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