समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन से जुड़ी एक बड़ी प्रशासनिक समस्या सामने आई है। आंगनबाड़ी सेविकाओं का आरोप है कि हर महीने गैस एजेंसी बदलने की प्रक्रिया के कारण उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे केंद्रों के नियमित संचालन और बच्चों को समय पर पोषण आहार उपलब्ध कराने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
सेविकाओं का कहना है कि गैस एजेंसी बदलने से हर बार नए दस्तावेज, सत्यापन और औपचारिकताओं की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इससे उनका काफी समय कार्यालयों में बीत जाता है, जबकि उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की देखभाल, पोषण आहार वितरण और अन्य जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करना होता है।
सेविकाओं ने जताई नाराजगी
आंगनबाड़ी सेविकाओं ने सवाल उठाते हुए कहा, "हम बच्चों को खिलाएं या दफ्तरों के चक्कर लगाएं?" उनका कहना है कि बार-बार एजेंसी बदलने से गैस सिलेंडर की आपूर्ति भी प्रभावित होती है, जिससे कई बार केंद्रों पर भोजन तैयार करने में दिक्कत आती है।
सेविकाओं का आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण अनावश्यक प्रशासनिक बोझ बढ़ रहा है और बच्चों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
पोषण कार्यक्रम पर पड़ रहा असर
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए संचालित पोषण कार्यक्रम गैस आपूर्ति पर निर्भर रहते हैं। गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं होने या एजेंसी बदलने की प्रक्रिया लंबी होने से भोजन तैयार करने में देरी हो सकती है।
सेविकाओं का कहना है कि यदि यह स्थिति लगातार बनी रही तो पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।
प्रशासन से स्थायी व्यवस्था की मांग
आंगनबाड़ी कर्मियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि गैस एजेंसी बार-बार बदलने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि एक स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उन्हें हर महीने नई औपचारिकताओं से न गुजरना पड़े।
सेविकाओं का सुझाव है कि लंबे समय के लिए एक एजेंसी निर्धारित कर दी जाए या ऐसी प्रणाली विकसित की जाए जिससे गैस आपूर्ति बिना बाधा के जारी रहे।
विभाग से समाधान की उम्मीद
मामला सामने आने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में समाधान की मांग की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन सेविकाओं की समस्याओं का संज्ञान लेकर ऐसी व्यवस्था करेगा, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन प्रभावित न हो और बच्चों को नियमित रूप से पोषण आहार मिलता रहे।
बच्चों के हित को प्राथमिकता देने की मांग
सेविकाओं ने कहा कि उनका मुख्य दायित्व बच्चों की देखभाल और पोषण सुनिश्चित करना है। यदि उन्हें बार-बार कार्यालयी प्रक्रियाओं में उलझाया जाएगा, तो इसका सीधा असर केंद्रों की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से बच्चों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की है।
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