भगवानपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ कार्यकर्ता और पूर्व जिला उपाध्यक्ष अजय शंकर पांडेय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपना त्यागपत्र स्वीकार करने का अनुरोध किया है।
अजय शंकर पांडेय ने अपने इस्तीफे में कहा है कि उन्होंने पिछले 21 वर्षों से लगातार पार्टी के लिए काम किया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वह स्वयं को पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने समाजहित को ध्यान में रखते हुए पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है।
प्रदेश अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा
अजय शंकर पांडेय ने 4 सितंबर 2026 को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपना इस्तीफा सौंपा।
पत्र में उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है।
उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर और पार्टी के साथ जुड़े अनुभवों का भी पत्र में उल्लेख किया।
21 वर्षों तक की पार्टी की सेवा
अजय शंकर पांडेय ने कहा कि वह पिछले 21 वर्षों से भाजपा के एक निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने पार्टी की विचारधारा और संगठन को मजबूत करने के लिए अपनी भूमिका निभाई। वह जिला स्तर पर भी संगठन से जुड़े रहे और उन्हें पूर्व जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी।
उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करने के बाद भी वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें अपेक्षित सम्मान और स्थान नहीं मिल रहा है।
आरक्षण और यूजीसी को लेकर उठाए सवाल
अपने इस्तीफा पत्र में अजय शंकर पांडेय ने आरक्षण और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में आरक्षण और यूजीसी जैसे कानूनों के माध्यम से सर्व समाज को गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर उनके जैसे कई समर्पित कार्यकर्ता असहज महसूस कर रहे हैं।
उपेक्षा महसूस करने का लगाया आरोप
अजय शंकर पांडेय ने कहा कि पार्टी में लंबे समय तक काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को उचित महत्व नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें और अन्य समर्पित कार्यकर्ताओं को उपेक्षित महसूस हो रहा है।
इसी कारण उन्होंने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है।
समाजहित को बताया इस्तीफे की वजह
उन्होंने कहा कि उन्होंने यह फैसला व्यक्तिगत कारणों से नहीं बल्कि समाजहित को ध्यान में रखते हुए लिया है।
पत्र में उन्होंने लिखा कि काफी विचार-विमर्श के बाद उन्होंने भाजपा और अपने पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से उनका इस्तीफा स्वीकार करने की अपील की है।
भाजपा में चर्चा तेज
अजय शंकर पांडेय के इस्तीफे के बाद भाजपा संगठन में चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के पद छोड़ने को राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, अभी तक भाजपा की ओर से इस इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संगठन के लिए चुनौती
राजनीतिक दलों के लिए लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं का महत्व काफी अधिक होता है। ऐसे में किसी वरिष्ठ कार्यकर्ता का इस्तीफा संगठन के लिए चिंता का विषय माना जा सकता है।
अजय शंकर पांडेय का भाजपा छोड़ने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब राजनीतिक दल लगातार अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने पर जोर दे रहे हैं।
आगे की राजनीति पर नजर
अजय शंकर पांडेय के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजर उनके अगले राजनीतिक कदम पर होगी।
उन्होंने फिलहाल किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने या आगे की रणनीति को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।
21 वर्षों तक भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अजय शंकर पांडेय का इस्तीफा स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में वह अपनी राजनीतिक यात्रा को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।