सुपौल में जर्जर पुल बना खतरा जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण
सुपौल का जर्जर पुल
सुपौल: बिहार के सुपौल जिले में तिलयुगा नदी पर बने एक पुल की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनी हुई है। पुल के कई हिस्सों से लोहे की रॉड बाहर निकल आई हैं, जबकि बीच का हिस्सा भी धंसता दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद आसपास के गांवों के लोग रोजाना इसी पुल से आवाजाही करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की हालत लगातार खराब होती जा रही है और समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है। तिलयुगा नदी पर बना यह पुल आसपास के कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ग्रामीण इसी रास्ते से बाजार, स्कूल, अस्पताल और दूसरे जरूरी कामों के लिए आते-जाते हैं। पुल की स्थिति खराब होने के कारण दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पुल की सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सीमेंट और कंक्रीट टूटने के कारण अंदर लगी लोहे की छड़ें बाहर दिखाई देने लगी हैं। इससे वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। पुल के बीच के हिस्से में धंसाव जैसी स्थिति ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक रात के समय यहां से गुजरना और भी खतरनाक हो जाता है। अंधेरे में सड़क की टूटी सतह और बाहर निकली लोहे की रॉड आसानी से दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में बाइक या साइकिल सवार संतुलन खोकर गिर सकते हैं। बारिश के दौरान पुल की स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि गड्ढों में पानी भरने से क्षतिग्रस्त हिस्सों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग सुविधाजनक नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में इसी पुल का इस्तेमाल करना पड़ता है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक रोजाना इस रास्ते से गुजरते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही होने पर पुल पर खतरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
लोगों ने प्रशासन से पुल की तकनीकी जांच कराने और जल्द से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों की अस्थायी मरम्मत करने के बजाय विशेषज्ञों से पुल की मजबूती की जांच कराई जानी चाहिए। अगर पुल आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं है तो वैकल्पिक व्यवस्था होने तक भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।
पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सुरक्षा उपायों की जरूरत भी महसूस की जा रही है। क्षतिग्रस्त हिस्सों के पास चेतावनी संकेत और बैरिकेडिंग जैसी व्यवस्था हादसों का जोखिम कम कर सकती है। तिलयुगा नदी के इस पुल की बदहाली अब ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की समस्या बन गई है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर जल्द कार्रवाई करेगा ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले पुल को सुरक्षित बनाया जा सके।