पटना : ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति से संबंधित आंकड़ों की प्रविष्टि नहीं करने पर जिले के 390 विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी यानी डीईओ योगेश कुमार ने सोमवार को जारी पत्र में यह कार्रवाई की जानकारी दी। संबंधित विद्यालयों को 24 घंटे के भीतर शत-प्रतिशत आंकड़ों की प्रविष्टि पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों से आदेश का पालन नहीं करने पर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
डीईओ के पत्र के अनुसार, संबंधित विद्यालयों को पहले भी कई बार ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर विद्यार्थियों की उपस्थिति का ब्योरा दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद 390 विद्यालयों में इस काम की शुरुआत नहीं की गई। विभाग ने इसे उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना है। इसी आधार पर संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने का निर्णय लिया गया। कार्रवाई के साथ लंबित प्रविष्टियों को पूरा करने के लिए स्पष्ट समयसीमा भी तय कर दी गई है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने संबंधित विद्यालयों से पूछा है कि आदेश की अवहेलना के लिए उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। इस सवाल के जरिए विद्यालयों से काम नहीं होने का कारण बताने को कहा गया है। वेतन रोकने के आदेश के साथ स्पष्टीकरण मांगने से यह स्पष्ट है कि मामला केवल लंबित आंकड़े भरने तक सीमित नहीं है। विभाग अब पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं होने को लेकर संबंधित शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की जवाबदेही भी तय करना चाहता है।
विद्यालयों को दिए गए 24 घंटे के समय में दो काम पूरे करने हैं। पहला, ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर विद्यार्थियों की उपस्थिति से संबंधित सभी आवश्यक आंकड़ों की प्रविष्टि करना। दूसरा, अब तक निर्देशों का पालन नहीं होने के संबंध में स्पष्टीकरण देना। डीईओ ने शत-प्रतिशत प्रविष्टि पूरी करने को कहा है। इसका अर्थ है कि संबंधित विद्यालयों को लंबित काम पूरा करना होगा। केवल कुछ विद्यार्थियों का ब्योरा दर्ज करने से निर्देश का पूरा पालन नहीं माना जा सकता।
इस कार्रवाई में विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति से संबंधित आंकड़ों और विद्यालयों की ओर से आंकड़े दर्ज करने की जिम्मेदारी के बीच अंतर समझना जरूरी है। वेतन रोकने का कारण विद्यार्थियों की उपस्थिति कम होना नहीं बताया गया है। पत्र के मुताबिक, कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि संबंधित विद्यालयों ने पोर्टल पर आवश्यक ब्योरा दर्ज करने का काम शुरू नहीं किया। इसलिए इसे छात्रों की कम उपस्थिति पर शिक्षकों को दंडित करने का मामला बताना सही नहीं होगा। आदेश का केंद्र आंकड़ों की लंबित प्रविष्टि है।
डीईओ की ओर से जारी पत्र में पहले दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। विभाग का कहना है कि विद्यालयों को उपस्थिति का ब्योरा दर्ज करने के लिए कई बार कहा गया था। इसके बाद भी काम शुरू नहीं होना कार्रवाई का आधार बना। इस तरह सोमवार का आदेश पूर्व निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा है। संबंधित विद्यालयों को अब अपने जवाब में यह स्पष्ट करना होगा कि बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद पोर्टल पर प्रविष्टि क्यों नहीं की गई और काम लंबित रहने की वजह क्या रही।
वेतन रोकने की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। इसका दायरा संबंधित 390 विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों तक बताया गया है। हालांकि, इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की कुल संख्या का उल्लेख उपलब्ध विवरण में नहीं है। इसलिए 390 को प्रभावित शिक्षकों की संख्या नहीं माना जा सकता। यह उन विद्यालयों की संख्या है, जहां विभाग के अनुसार काम शुरू नहीं हुआ। प्रत्येक विद्यालय में शिक्षकों की संख्या के आधार पर प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या अलग होगी।
आदेश में विभागीय कार्रवाई शुरू करने के संबंध में कारण बताने को कहा गया है। फिलहाल इसे विभागीय कार्रवाई पूरी हो जाने या किसी कर्मचारी को सेवा से हटाए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अभी वेतन रोकने का निर्णय लिया गया है और स्पष्टीकरण मांगा गया है। विद्यालयों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और लंबित काम की स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय स्पष्ट होगा। उपलब्ध जानकारी में किसी शिक्षक या प्रधानाध्यापक के निलंबन का उल्लेख नहीं किया गया है।
इस मामले में संबंधित विद्यालयों के सामने सबसे जरूरी काम निर्धारित समय के भीतर पोर्टल पर पूरा ब्योरा दर्ज करना है। साथ ही उन्हें अपने स्पष्टीकरण में निर्देशों का पालन नहीं होने का कारण बताना होगा। आदेश में वेतन दोबारा जारी करने की कोई निश्चित तारीख या अलग प्रक्रिया नहीं बताई गई है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि आंकड़े भरते ही वेतन स्वतः जारी हो जाएगा। इस संबंध में स्थिति विभाग के अगले निर्देश या निर्णय से ही स्पष्ट होगी।
सोमवार को जारी इस पत्र के बाद जिले के संबंधित विद्यालयों को लंबित प्रविष्टियों के लिए 24 घंटे की समयसीमा मिल गई है। डीईओ योगेश कुमार ने पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं होने पर वेतन रोकने के साथ जवाब भी मांगा है। अब विद्यालयों की ओर से आंकड़े दर्ज करने और स्पष्टीकरण देने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। विभाग की कार्रवाई का मुख्य आधार यही है कि विद्यार्थियों की उपस्थिति से संबंधित आवश्यक जानकारी बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज करने का काम शुरू नहीं किया गया।