उत्तराखंड
CM धामी बोले मोदी सरकार ने पूरी की सैनिकों की पुरानी मांग
Ratna Netam
12 Oct 2026 8:09 PM IST

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर सराहना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के फैसलों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सैनिकों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 'वन रैंक वन पेंशन' (OROP) योजना का उल्लेख किया और इसे पूर्व सैनिकों के हित में लिया गया बड़ा फैसला बताया। इसके साथ ही उन्होंने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई की भी प्रशंसा की।मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले की सरकारें सैनिकों की कई पुरानी मांगों को पूरा नहीं कर सकीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सीमा पार से मिलने वाले खतरों के खिलाफ भी पर्याप्त ठोस कार्रवाई नहीं की गई। धामी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सैनिकों की जरूरतों, उनके परिवारों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी गई है।
वन रैंक वन पेंशन को बताया ऐतिहासिक फैसला
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन योजना का लागू होना देश के सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।उन्होंने बताया कि यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी और सैनिक समुदाय इसके समाधान की प्रतीक्षा कर रहा था।धामी ने कहा, "प्रधानमंत्री ने सेना के जवानों की चिंताओं, जरूरतों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए लगातार काम किया। इसी का नतीजा था कि 'वन रैंक वन पेंशन' योजना लागू हो सकी—एक ऐसी योजना जिसका देश के सैनिक और नागरिक लगभग 40 सालों से इंतजार कर रहे थे।"मुख्यमंत्री ने इस फैसले को केंद्र सरकार की सैनिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।उनके अनुसार, यह योजना केवल पेंशन से जुड़ा निर्णय नहीं है, बल्कि सैनिकों के सम्मान और उनके योगदान को मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सैनिकों की पुरानी मांगों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों की जरूरतों पर लगातार ध्यान दिया जाना आवश्यक है।उन्होंने सैनिकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने उनके समाधान को प्राथमिकता दी।धामी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए लगातार काम किया है।उन्होंने वन रैंक वन पेंशन को इसी नीति का परिणाम बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों की चिंताओं को समझना और उनके हितों से जुड़े निर्णय लेना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।उनका यह बयान सेना के जवानों और पूर्व सैनिकों के कल्याण को लेकर केंद्र सरकार के कामकाज की सराहना के रूप में सामने आया है।
क्या है वन रैंक वन पेंशन योजना?
वन रैंक वन पेंशन का उद्देश्य समान रैंक और समान सेवा अवधि वाले पात्र पूर्व सैनिकों के लिए सेवानिवृत्ति की तारीख से उत्पन्न पेंशन संबंधी अंतर को दूर करना है।इस व्यवस्था के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार पेंशन में समानता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।यह मुद्दा लंबे समय से पूर्व सैनिकों की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि सैनिक समुदाय को इसके समाधान के लिए लगभग चार दशक तक इंतजार करना पड़ा।उन्होंने योजना लागू करने के फैसले का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को दिया।हालांकि, मुख्यमंत्री के उपलब्ध बयान में योजना के लाभार्थियों की संख्या या वित्तीय आवंटन से संबंधित कोई नया आंकड़ा नहीं दिया गया है।
2014 से पहले की सरकारों पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री धामी ने सैनिक कल्याण के मुद्दे पर पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना भी की।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से पहले की सरकारें सैनिकों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने में विफल रहीं।उनके अनुसार, सेना से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर समय रहते निर्णय नहीं लिए गए।मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आने के बाद सैनिकों की जरूरतों पर अधिक ध्यान दिया गया।उन्होंने वन रैंक वन पेंशन योजना को अपनी बात के समर्थन में प्रमुख उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।हालांकि, पूर्ववर्ती सरकारों के संबंध में धामी की टिप्पणियां उनका राजनीतिक आकलन हैं।
सीमा पार आतंकवाद पर कड़े कदमों की सराहना
सैनिक कल्याण के साथ मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के कड़े और त्वरित कदमों की प्रशंसा की।धामी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में निर्णायक कार्रवाई महत्वपूर्ण है।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से पहले सीमा पार से उत्पन्न खतरों के खिलाफ पर्याप्त ठोस कदम नहीं उठाए गए।मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान केंद्र सरकार ने ऐसे खतरों से निपटने के लिए कड़ा रुख अपनाया है।हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने किसी विशिष्ट सैन्य अभियान की तारीख या कार्रवाई का विस्तृत विवरण नहीं दिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया महत्वपूर्ण विषय
मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों के कल्याण को एक-दूसरे से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के रूप में प्रस्तुत किया।उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिएउन्होंने कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों के हित में निर्णय लेने के साथ सीमा पार से आने वाले खतरों का प्रभावी जवाब देना भी आवश्यक है।मुख्यमंत्री ने इन दोनों विषयों पर केंद्र सरकार के दृष्टिकोण की सराहना की।उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों में स्पष्टता और तत्परता दिखाई गई है।
सैनिक परिवारों के कल्याण पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में केवल सेना के जवानों का ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के कल्याण का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सैनिकों की चिंताओं और जरूरतों को समझते हुए उनके परिवारों के हितों के लिए भी काम किया है।सैनिक कल्याण के संदर्भ में पेंशन जैसी व्यवस्थाएं सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी होती हैं।इसी कारण वन रैंक वन पेंशन का मुद्दा पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण रहा है।धामी ने इस योजना के कार्यान्वयन को सैनिकों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी निभाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के बयान का महत्व
उत्तराखंड में सेना और सैनिक परिवारों से जुड़े मुद्दों का विशेष सामाजिक महत्व है।राज्य के अनेक परिवारों का संबंध सैन्य सेवाओं से रहा है।ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से वन रैंक वन पेंशन और सैनिक कल्याण का मुद्दा उठाया जाना महत्वपूर्ण है।धामी ने अपने बयान में सैनिकों की पुरानी मांगों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों को प्रमुखता दी।उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों की प्रशंसा करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।हालांकि, उनके बयान में उत्तराखंड के लिए किसी नई सैनिक कल्याण योजना की घोषणा का उल्लेख नहीं किया गया है।
केंद्र सरकार के फैसलों को बताया निर्णायक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सैनिकों की जरूरतों को समझते हुए महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।उन्होंने वन रैंक वन पेंशन को सैनिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग के समाधान का उदाहरण बताया।इसके साथ ही सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के कड़े रुख की भी सराहना की।धामी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर सैनिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अपेक्षित कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया।उनका यह बयान केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिक कल्याण संबंधी नीतियों के समर्थन में सामने आया है।
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