बिहार: सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए नया ‘Triple T’ फॉर्मूला लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अब Technology, Transparency और Trust के आधार पर मजबूत किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस मॉडल से न केवल सरकारी कामकाज अधिक पारदर्शी होगा, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी प्रशासन पर बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘Triple T’ फॉर्मूले का पहला आधार टेक्नोलॉजी है, जिसके तहत सरकारी सेवाओं में आधुनिक डिजिटल सिस्टम और तकनीक का अधिक उपयोग किया जाएगा। दूसरा आधार Transparency यानी पारदर्शिता है, जिसके तहत हर प्रशासनिक प्रक्रिया को खुला और जवाबदेह बनाया जाएगा। तीसरा आधार Trust यानी जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सुशासन केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके ईमानदारी से पालन से स्थापित होता है।
मुख्यमंत्री ने सभी जांच एजेंसियों जैसे विजिलेंस, स्पेशल यूनिट और आर्थिक अपराध इकाई को और अधिक सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की एजेंसियां इतनी मजबूत और प्रभावी होनी चाहिए कि दूसरे राज्यों को भी उनसे सहयोग लेना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही राज्य में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। इसके तहत एक जागरूकता सप्ताह भी आयोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि “शॉर्टकट का रास्ता सीधे बेउर जेल तक जाता है।” उन्होंने साफ कहा कि चाहे कोई भी व्यक्ति हो—नेता, मंत्री, विधायक या अधिकारी—अगर वह भ्रष्टाचार में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि ब्लॉक कार्यालयों और थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतें अधिक मिलती हैं। इस पर विशेष निगरानी रखने और व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। कुल मिलाकर सरकार का लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाकर भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाना और सुशासन को मजबूत करना है।