
Bihar: हिंदी साहित्य के महान कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के जीवन पर अब फिल्म बनने जा रही है। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘मैला आंचल’ से पहचान बनाने वाले रेणु की जीवन यात्रा को बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। इस फिल्म का नाम ‘रेणु’ रखा गया है और इसका निर्माण उगना इंटरटेनमेंट के बैनर तले किया जाएगा। फिल्म का उद्देश्य केवल एक लेखक की जीवनी दिखाना नहीं, बल्कि उनके विचार, संघर्ष और ग्रामीण भारत की उस आत्मा को सामने लाना है, जिसे उन्होंने अपनी रचनाओं में जीवंत किया था।
यह फिल्म अगले वर्ष मार्च तक रिलीज करने की योजना के साथ आगे बढ़ रही है। फिल्म की टैगलाइन ‘मैंने लाखों के बोल सहे’ रखी गई है, जो रेणु के साहित्यिक दृष्टिकोण और जीवन संघर्ष को दर्शाती है। बताया जा रहा है कि फिल्म की कहानी को तैयार करने से पहले कई महीनों तक गहन शोध और अध्ययन किया गया है, ताकि उनके जीवन को प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत किया जा सके। अररिया से सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने इस फिल्म को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया है। उन्होंने कहा कि फणीश्वरनाथ रेणु ने अररिया और सीमांचल क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उनका मानना है कि इस फिल्म के माध्यम से नई पीढ़ी को रेणु के साहित्य और उनके योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।
फिल्म से जुड़ी टीम का कहना है कि रेणु केवल एक साहित्यकार नहीं थे, बल्कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और बाद में जेपी आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके लेखन में गांव, किसान, मजदूर और आम लोगों की वास्तविक जिंदगी को गहराई से दर्शाया गया है। फिल्म की पटकथा तैयार करने वाली टीम ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर पिछले छह से सात महीनों से लगातार काम किया जा रहा है। इसमें डॉक्यूमेंट्री और रिसर्च आधारित सामग्री का उपयोग किया गया है ताकि कहानी वास्तविकता के करीब रहे।
कलाकारों का मानना है कि रेणु पर विदेशों में भी काफी शोध होता है, लेकिन भारत में और खासकर उनके अपने क्षेत्र में लोग उनके योगदान से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ऐसे में यह फिल्म एक सांस्कृतिक जागरूकता का माध्यम भी बनेगी। इस फिल्म के जरिए न केवल फणीश्वरनाथ रेणु की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, बल्कि अररिया और सीमांचल क्षेत्र को भी एक नए सांस्कृतिक मंच के रूप में पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि फिल्म सफल रहती है तो यह साहित्य और सिनेमा के साथ-साथ क्षेत्रीय संस्कृति के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।





